मुकुल के पिता दिलिप खेदड़ ने बताया कि उनका सपना सिविल सेवा में जाना था। इसके लिए वह लगातार तैयारी में जुटे थे। बेटे मुकुल का क्रिकेट के प्रति रूझान बढ़ता तो देखा तो तैयारी छोड़ दी। मुकुल क्रिकेट की तैयारी के लिए आठवीं कक्षा में सीकर लेकर आए। यहां से मुकुल ने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत की। मूलतः झुंझुनूं जिले के निवासी मुकुल ने बताया कि भारतीय टीम से खेलना उनका लक्ष्य है। मां सुनीता देवी ने बताया कि क्रिकेट में आने के बाद उन्होंने सिर्फ क्रिकेट पर ही फोकस रखा।