
Rajasthan Election 2018
सीकर.rajasthan election 2018 के चुनावी रण में पार्टियों की जीत की डोर पूरी तरह जातियों पर ही टिकी है। इसलिए जाट बाहुल्य शेखावाटी में भाजपा व कांग्रेस ने सबसे ज्यादा टिकट जाट प्रत्याशियों को ही दिए है। इस बार शेखावाटी में भाजपा व कांग्रेस ने आठ-आठ जाट प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। इन सभी सीटों पर लगातार जाट प्रत्याशी ही चुनाव जीतते आ रहे हैं।
रोचक बात यह है कि शेखावाटी की जिन चार सीटों पर ज्यादा बगावत है वहां उनकी जाति का काफी प्रभाव है। भाजपा ने इस बार भी शेखावाटी में किसी भी मुस्लिम प्रत्याशी को मैदान में नहीं उतारा है। पहले फतेहपुर से सार्वजनिक निर्माण मंत्री युनूस खान को उतारना तय था, लेकिन आखिरी समय में उनको टोंक भेज दिया गया। इसके अलावा दोनों पार्टियों ने सक्रियता के आधार पर अलग-अलग जातियों पर भी भरोसा जताया है।
जाति के हिसाब से मिलती है मंत्रिमंडल में जगह
शेखावाटी के प्रत्याशी को मंत्रिमंडल में तवज्जो भी जाति के हिसाब से ही मिलती है। चुनाव के वर्तमान परिदृश्य को देखे तो दोनों प्रमुख पार्टियों ने जाति पर ही दावं खेला है। इसमें जाट समाज को दोनों ही पार्टियों ने समान रूप से टिकट देने की पहल की है।
दांतारामगढ़ में दूसरी बार कुमावत
दांतारामगढ़ में जातीय समीकरणों को देखते हुए भाजपा ने दूसरी बार कुमावत जाति के प्रत्याशी को मैदान में उतारा है। पिछले चुनाव में कुमावत 534 मतों से चुनाव हारे थे। ऐसे में भाजपा ने फिर से कुमावत पर ही भरोसा जताया है। वहीं कांग्रेस ने जाट को ही प्रत्याशी बनाया है। यहां से भाजपा कुमावत के अलावा राजूपत प्रत्याशी पर भी दांव लगा चुकी है।
फतेहपुर-लक्ष्मणगढ़ : इस बार भाजपा ने बदला गणित
फतेहपुर व लक्ष्मणगढ़ में लगातार हार के बाद इस बार फतेहपुर विधानसभा में भाजपा ने चेहरा बदल दिया है। पिछले चुनाव में यहां भाजपा ने मधुसूदन भिण्डा को चुनावी मैदान में उतारा था, लेकिन वह निर्दलीय प्रत्याशी नंदकिशोर महरिया से चुनाव हार गए। ऐसे में ने जातीय फैक्टर को आधार मानते हुए टिकट दिया है। कांग्रेस ने यहां से मुस्लिम प्रत्याशी को मैदान में उतारा है।
लक्ष्मणगढ़ से भाजपा ने पिछले चुनाव पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया को मैदान में उतारा था। लेकिन यहां से कांग्रेस प्रत्यायाी गोविन्द सिंह डोटासरा चुनाव जीत गए। ऐसे में पार्टी ने इस बार यहां से ब्राह्मण प्रत्याशी को मैदान में उतारा है। पार्टी के सामने यहां दोनों जातियों के दावेदार थे, लेकिन वोटों के धुव्रीकरण के चलते ब्राह्मण प्रत्याशी पर विश्वास जताया।
जातीय गणित के आधार पर हुए बागी
शेखावाटी में बगावत वाली सीटों का आधार भी जातीय गणित है। खंडेला से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लडऩे वाले महादेव सिंह खंडेला निर्दलीय के तौर पर चुनावी मैदान में है। यहां सर्वाधिक जाट मतदाता है, ऐसे में उन्होंने ताल ठोक दी है। इसी तरह रतनगढ़ विधानसभा ब्राह्मण बाहुल्य है, ऐसे में यहां टिकट कटने के बाद भी देवस्थान राज्य मंत्री राजकुमार रिणवां ने ताल ठोक दी है। इसी तरह तारानगर सीट से जातीय समीकरणों के हिसाब से सीएस बैद व नीमकाथाना से रमेश खंडेलवाल भी मैदान में है।
यूं है शेखावाटी में जाति का खेल
भाजपा
जाट 08
राजपूत 02
सैनी 01
ब्राह्मण 03
एससी 03
वैश्य 01
जांगिड़ 01
गुर्जर 01
कुमावत 01
मुस्लिम 00
कांग्रेस
जाट 08
राजपूत 01
सैनी 01
ब्राह्मण 04
एससी 03
वैश्य 01
जांगिड़ 00
गुर्जर 01
कुमावत 00
मुस्लिम 02
Published on:
21 Nov 2018 11:06 am
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