
सीकर.
कभी हास्य के फुहारों में गोता लगाते श्रोता तो कभी वीर रस की कविता पर फडक़ती भुजा और इनके सबके बीच खुले मैदान में गूंजती तालियों की गडगड़़ाहट। राणी सती मंदिर के मैदान में राजस्थान ब्रह्मण महासभा की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन में कुछ ऐसा ही नजारा दिखाया दिया। कवि सम्मेलन की शुरुआत वीर रस की कवियत्री कविता तिवारी ने मां शारदे की आराधना से की। कविता ने अगर माटी के पुतले देह में ईमान जिंदा है, तभी इस देश की समृद्धि का अरमान जिंदा है। ना भाषण से है उम्मीदें ना वादों पर है भरोसा, शहीदों की बदौलत मेरा हिन्दुस्तान है जिंदा सुनाई। हास्य व व्यंग्य रस के कवि सुरेश अलबेला ने हॉल ही में एक युवती के वीडिय़ो के वायरल होने पर कहा कि ऐसी चली कि चाल कली हूर हो गई उसके नशे में कायनात चूर हो गई। इटारसी के कवि राजेन्द्र मालवीय ने कहा कि मैंने तो सिर्फ एक लाइन कही थी, देखते ही देखते छन्द हो गया, जुल्फों का गुलाब डिब्बे में गुलकन्द हो गया। संपत सरल ने कहा लोग कहते है कि मोदीजी धुंआधार काम कर रहे हैं, यह अलग बात है काम में धार कम है धुंआ ज्यादा है। नोटबंदी एवं जीएसटी से बाजे तो बच गए और कबूतर मारे गए। कार्यक्रम का संचालन नवलगढ़ के हास्य कवि हरिश हिन्दुस्तानी ने किया। शेखावाटी के मयंक मिश्रा ने युवाओं को संदेश दिया कि मेहनत व संघर्ष करने से मंजिल जरूर मिलती है। इससे पहले ललित मिश्रा, पुरुषोत्तम पांडे, ओमप्रकाश कावडिय़ा, प्रकाश दाधीच आदि ने कवियों का स्वागत किया। सम्मेलन में राज्यसभा सदस्य मदनलाल सैनी, नवलगढ़ विधायक डॉ राजकुमार शर्मा, सीकर विधायक रतनजलधारी, पूर्व मंत्री राजेन्द्र पारीक, सभापति जीवण खां,रीटा सिंह, राजकुमारी शर्मा शर्मा सहित अनेक लोग मौजूद थे।
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Published on:
06 May 2018 04:01 pm
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