
खाटूश्यामजी। प्रदेश में धार्मिक पर्यटन का हब बन चुके खाटूश्यामजी व सालासर में अब भी पर्यटन की डोर बेहद कमजोर है। एक तरफ सरकार की ओर से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए रोजाना दावे किए जा रहे हैं। इसके बाद भी खाटूश्यामजी व सालासर आने वाले ज्यादातर भक्त निजी परिवहन सेवा के ही भरोसे है।
सालासर व खाटूश्यामजी में हर साल औसतन डेढ़ करोड़ भक्त पहुंच रहे हैं। इसके बाद भी बड़े शहरों को जोड़ने के लिए अभी भी बस सेवा का अभाव है। जबकि रेल मार्ग के लिए अभी काम शुरू होगा। एक्सपर्ट का कहना है कि यदि राज्य सरकार दोनों शहरों के लिए बेहतर परिवहन सेवा शुरू करें तो भक्तों को फायदा मिलने के साथ सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी हो सकती है। पिछली सरकार के समय भी धार्मिक पर्यटक स्थलों के लिए विशेष बस सेवा शुरू करने की घोषणा हुई थी, लेकिन अभी तक शेखावाटी के भक्तों को इसका फायदा नहीं मिल सका है।
खाटूश्यामजी में रोडवेज की खुद की अच्छी खासी जगह होने के बावजूद यात्रियों के लिए बेहतर सुलभ कॉपलेक्स और विश्राम स्थली नहीं है। वहीं पर्याप्त बसें नहीं होने से यात्रियों को अधिक दाम देकर निजी बसों या टैक्सी गाड़ियों का सहारा लेना पड़ता है। हालत यह है कि खाटू आने वाले 60 से 70% भक्त निजी सेवा के सहारे ही सफर तय करते है।
यहां रोडवेज का खुद की जगह नहीं है। ग्राम पंचायत की जगह पर दानदाता की ओर से बनाए गए स्टैंड पर ही रोडवेज और निजी बसों का ठहराव एक ही जगह हो रहा है। सालासर में एक ही परिचालक की ड्यूटी लगा रखी है जो पर्ची काटने से लेकर पूछताछ आदि का काम वही देखता है। यहां से रोडवेज की दिनभर में केवल एक बस ही संचालित होती है।
खाटूश्यामजी में आने वाले दर्शनार्थियों में 30 से 40 प्रतिशत श्रद्धालु सालासर बालाजी के दर्शन करने के लिए जाते है। रोडवेज की सुबह दस बजे सालासर के लिए एक ही बस है। वहीं निजी रूट बस भी सीकर तक के लिए संचालित है। ऐसे में टैक्सी गाड़िया यात्रीभार के अनुसार हर एक घंटे में सालासर के लिए चलती है।
Published on:
25 Nov 2024 04:33 pm
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