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Khatu Shyam Ji News : एकादशी मेले से पहले क़ानून व्यवस्था पर सवाल, अब तोरण द्वार के पास युवक पर हमला- हालत नाज़ुक 

प्रसिद्ध धार्मिक नगरी खाटूश्यामजी के तोरण द्वार पर कमरा किराए पर लेने के विवाद में युवक पर जानलेवा हमला। गंभीर हालत में सीकर रेफर। स्थानीय लोगों ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल। पढ़ें रिपोर्ट।
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सीकर

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Nakul Devarshi

May 27, 2026

Insight PIC : तोरण द्वार के पास हुई ताज़ा घटना

Insight PIC : तोरण द्वार के पास हुई ताज़ा घटना

राजस्थान की सबसे प्रतिष्ठित और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था नगरी खाटूश्यामजी में कानून व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन एक बार फिर गंभीर स्थिति में है। कस्बे के सबसे व्यस्ततम और मुख्य मार्ग माने जाने वाले 'तोरण द्वार' क्षेत्र में हाल ही में हुई एक हिंसक झड़प ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस सुरक्षा के दावों की पोल खोलकर रख दी है। एकादशी मेले की तैयारियों के बीच हुई इस हिंसक घटना से पूरे कस्बे के नागरिकों और व्यापारियों में भय और असुरक्षा का माहौल व्याप्त हो गया है। पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद तोरण द्वार के निकट एक कमरा बुक करने और उसे किराए पर लेने की बात को लेकर शुरू हुआ था। देखते ही देखते इस मामूली कहासुनी ने एक भयानक हिंसक रूप धारण कर लिया, जिसके बाद लाठी, डंडों और लोहे के धारदार सरियों से लैस कुछ असामाजिक तत्वों ने वहां मौजूद एक स्थानीय युवक पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया, जिससे वह लहूलुहान होकर मौके पर ही गिर पड़ा।

जानलेवा हमला, गंभीर हालत में सीकर रेफर

इस बर्बर और हिंसक वारदात का शिकार हुआ घायल युवक 27 वर्षीय करण कुमावत है, जो सीकर जिले के ही रानोली थाना क्षेत्र के अंतर्गत त्रिलोकपुरा गांव का निवासी बताया जा रहा है। आरोपियों ने करण पर लोहे के सरियों और भारी लाठियों से सिर और शरीर के अन्य संवेदनशील हिस्सों पर लगातार कई वार किए। हमले के कारण करण के सिर में गंभीर चोटें आईं और वह अत्यधिक खून बह जाने के कारण अचेत हो गया।

घटना के तुरंत बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और स्थानीय लोगों की मदद से घायल करण कुमावत को तुरंत खाटूश्यामजी के स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद भी युवक की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ और उसकी अत्यंत नाजुक व चिंताजनक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे बेहतर न्यूरोलॉजिकल इलाज के लिए तुरंत सीकर के जिला अस्पताल (राजकीय कल्याण अस्पताल) के लिए रेफर कर दिया।

अस्पताल के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी घायल युवक को अभी तक होश नहीं आया है और वह आईसीयू (ICU) में वेंटिलेटर सपोर्ट पर डॉक्टरों की सघन निगरानी में है।

आय दिन हो रही घटनाएं, लोगों का फूटा गुस्सा

तोरण द्वार जैसी अत्यधिक व्यस्त जगह पर दिनदहाड़े हुई इस वारदात के बाद खाटूश्यामजी के स्थानीय व्यापारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा है। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि पिछले कुछ महीनों से धार्मिक नगरी में इस प्रकार के आपसी झगड़े, सट्टेबाजी, असामाजिक तत्वों का जमावड़ा और मारपीट की घटनाएं आम बात हो चुकी हैं।

व्यापारियों का आरोप है कि देश-विदेश से आने वाले श्याम भक्तों की सुरक्षा के लिए जो मुस्तैदी पुलिस महकमे को दिखानी चाहिए, वह धरातल पर नजर नहीं आ रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कस्बे के प्रमुख चौराहों और होटलों के आसपास संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त रहने वाले युवकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन स्थानीय थाना पुलिस प्रभावी और दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय केवल औपचारिक शिकायतों और कागजी खानापूर्ति तक ही सीमित दिखाई दे रही है, जिससे अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं।

पहले भी सामने आ चुकी हैं बड़ी प्रशासनिक खामियां

खाटूश्यामजी कस्बे के बुनियादी ढांचे और आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों का इतिहास पुराना रहा है। स्थानीय नागरिकों ने कुछ समय पहले मंदिर के ठीक पास स्थित एक होटल में लगी भीषण आग की घटना का हवाला देते हुए बताया कि उस समय भी दमकल की गाड़ियों और राहत सामग्री को घटना स्थल तक पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ी थी।

कस्बे की संकरी गलियां, अनियोजित तरीके से बने व्यावसायिक परिसर और आपातकालीन निकास की व्यवस्था न होना यहां की सबसे बड़ी संरचनात्मक समस्या है। स्थानीय सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब भी कस्बे में कोई बड़ी आगजनी, भगदड़ या हिंसक झड़प जैसी आपातकालीन स्थिति उत्पन्न होती है, तो प्रशासन के पास त्वरित संसाधन और कार्ययोजना का घोर अभाव साफ झलकता है। यदि तोरण द्वार जैसी जगह पर तुरंत पुलिस बल तैनात रहता, तो करण कुमावत के साथ हुई इस जानलेवा वारदात को समय रहते रोका जा सकता था।

प्रशासन के खिलाफ आमजन में भारी असंतोष

इस सुरक्षा संकट को लेकर सबसे विचारणीय बिंदु यह है कि खाटूश्यामजी के जागरूक नागरिक, होटल एसोसिएशन और स्थानीय सामाजिक संगठन पिछले लंबे समय से पुलिस महानिदेशक, जिला कलेक्टर और स्थानीय थाना अधिकारी को लिखित ज्ञापन सौंपकर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की गुहार लगा रहे हैं। इन ज्ञापनों में लगातार बढ़ती अनियंत्रित भीड़, यातायात जाम की विकराल समस्या, अवैध पार्किंग और असामाजिक तत्वों की धरपकड़ के लिए विशेष पुलिस चौकियां स्थापित करने की मांग की जा चुकी है।

परंतु, क्षेत्रवासियों का स्पष्ट आरोप है कि इन सभी लिखित चेतावनियों और जनहित की मांगों को प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। जब तक कोई बड़ी अनहोनी या खूनी संघर्ष नहीं हो जाता, तब तक पुलिस महकमा अपनी नींद से नहीं जागता है। तोरण द्वार की इस ताजा घटना ने प्रशासनिक संवेदनशीलता और जनता की सुरक्षा के प्रति उनकी जवाबदेही पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा कैसे होगी सुनिश्चित?

खाटूश्यामजी में हर महीने आयोजित होने वाला मासिक एकादशी मेला एक अत्यंत विशाल और महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है, जिसमें भाग लेने के लिए राजस्थान के अलावा हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, गुजरात और उत्तर प्रदेश से लाखों की संख्या में श्याम भक्त खाटू नगरी पहुंचते हैं। तोरण द्वार ही वह मुख्य मार्ग है जहां से होकर सभी श्रद्धालु बाबा श्याम के दर्शनों के लिए मुख्य मंदिर की कतारों में प्रवेश करते हैं।

ऐसे मुख्य मार्ग पर एकादशी मेले से ठीक पहले हुए इस खूनी संघर्ष ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि मेले से पहले ही कानून व्यवस्था की स्थिति इतनी जर्जर है कि लोग लाठी-सरियों के साथ खुलेआम घूम रहे हैं, तो मेले के दौरान जब लाखों की भीड़ एक साथ कस्बे में मौजूद होगी, तब प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को कैसे नियंत्रित कर पाएगा? श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर बढ़ती यह चिंता पूरी तरह से व्यावहारिक और जायज है।

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