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शेखावाटी के किशन सिंह शेखावत ने भारत-पाक युद्ध में दिखाया था दमखम, 84 वर्ष की उम्र में मिला वीरता पुरस्कार

वे सीआरपीएफ में 1952 में भर्ती हुए थे तथा 1972 में सेवानिवृत हुए थे।

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kishan singh shekhawat

गुढ़ागौडज़ी. लीला की ढाणी के किशन सिंह शेखावत को सेवानिवृत के 45 वर्ष बाद 84 वर्ष की उम्र में वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्हे यह पुरस्कार शौर्य दिवस पर 9 अप्रेल को दिल्ली के मावलंकर हाल में आयोजित कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति वैंकयानायडू ने उन्हे शॉल ओढ़ाकर व स्मृति प्रदान किया। सीआरपीएफ के डीजी की ओर से उन्हे यह पुरस्कार मिलने पर 6 लाख रूपए नगद व इन्दिरा गांधी नहर क्षेत्र में 25 बीघा जमीन प्रदान की घोषणा की गई है। वे सीआरपीएफ में 1952 में भर्ती हुए थे तथा 1972 में सेवानिवृत हुए थे। पुरस्कार लेकर गुढ़ागौडज़ी पहुंचने पर कस्बे वासियों की ओर से उनका स्वागत किया गया।

1965 के भारत-पाक युद्ध में दिखाई थी वीरता
1965 में भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान की सेना की एक ब्रिगेड ने गुजरात के कच्छ के रण की एक भारतीय पोस्ट पर हमला किया था। उस समय सीआरपीएफ की बटालियन की टुकड़ी ने 9 अप्रेल 1965 में पाकिस्तान की सेना का सामना किया था। इस युद्ध में पाकिस्तान की सेना के 35 जवान व दो अधिकारी मारे गए थे। इस युद्ध में सीआरपीएफ में कार्यरत किशन सिंह शेखावत ने भी भाग लिया था।

पहले मिला चुका है पुलिस गैलेन्ट्री अवार्ड
किशन सिंह के पुत्र रणवीर सिंह लीला की ढाणी ने बताया कि 9 जुलाई 1965 को इस बटालियन के किशन सिंह सहित सात जवानों को पुलिस मैडल फोर गैलेन्ट्री से सम्मानित किया गया था। लेकिन उस समय अद्र्ध सैनिक बलों के जवानों को सेना की तरह दर्जा व सम्मान नहीं मिलने के कारण उन्हे अब तक यह सम्मान नहीं मिल पाया था। इसके लिए उन्होने लम्बी कानूनी लड़ाई लड़ी । केन्द्र सरकार द्वारा अद्र्ध सैनिक बलों के जवानों को भी सेना के समान सुविधाएं व दर्जा देने के निर्णय के बाद उन्हे यह सम्मान मिला है।

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