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देखते रह गए सीकर के सांसद-विधायक और चूरू वाले ले गए यहां के मेडिकल कॉलेज का स्टाफ

सीकर मेडिकल कॉलेज में लगाए गए नर्स ग्रेड टू के कर्मचारियों को चूरू मेडिकल कॉलेज के लिए भेज दिया गया है।

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rahul kaswa or sumedhanand

rahul kaswa or sumedhanand

सीकर.

सीकर जिले के लोगों को पिछले दो साल से मेडिकल कॉलेज शुरू करने का सब्जबाग दिखाने वाली सरकार ने मेडिकल कॉलेज का स्टाफ ही छीन लिया है। जिले के जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का नतीजा है कि सीकर मेडिकल कॉलेज में लगाए गए नर्स ग्रेड टू के कर्मचारियों को चूरू मेडिकल कॉलेज के लिए भेज दिया गया है। सांवली रोड स्थित भवन में 2016 में छह हजार 67 वर्ग फिट में भवन का निर्माण की स्वीकृति मिली थी। स्वीकृति मिलने बाद नेताओं में मची होड़ के कारण भवन की ओर ध्यान तक नहीं दिया गया। नतीजन चिकित्सा मंत्री का गृह जिला होने के बाद एमसीआई के निरीक्षण की स्वीकृति मिल सके पिछले दो साल में मेडिकल कॉलेज में उतना काम भी नहीं हो पाया।


मजबूत था दावा फिर भी पिछड़े

जयपुर और चूरू, गंगानगर, हनुमानगढ़, नागौर, झुंझुनूं सहित कई जिलों के बीच स्थित सीकर जिले का दावा मेडिकल कॉलेज के प्रबल रहा है। जिले के हजारों विद्यार्थी हर साल मेडिकल कॉलेज में पढऩे के लिए जाते हैं। इसे देखते हुए सीकर का दावा अन्य जिलों से हमेशा प्रबल रहा है। वहीं दूसरे जिले में मेडिकल कॉलेज का निर्माण धीमे चल रहा है लेकिन नेताओं की कमजोर पैरवी और कथित राजनीति के कारण सीकर में मेडिकल कॉलेज में इस बार भी बैच स्वीकृति मिलना दूर की कौड़ी नजर आ रहा है हालांकि मेडिकल कॉलेज के प्रिंसीपल एंड कंट्रोलर ने तबादले करने वाले सभी नर्स को रिलीव नहीं करने के मौखिक आदेश दिए हैं। और मेडिकल कॉलेज को इस सत्र में शुरू करवाने की बात कही है।


यह है हकीकत...


सरकार ने चूरू, भरतपुर, डूंगरपुर, सीकर, पाली, भीलवाड़ा और बाडमेर में मेडिकल कॉलेज शुरू करने की अनुमति एससीआई से मांगी थी। इसके लिए 189 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए थे। जिसमें 139 करोड़ रुपए भवन निर्माण कार्य पर खर्च होने हैं। जबकि शेष 50 करोड रुपए में उपकरण व अन्य सामग्री खरीदी जानी है। इसके लिए एमसीआई ने नवम्बर 2017 में सीकर मेडिकल कॉलेज और अटैच संस्थानों का निरीक्षण भी किया।

सीकर में 28 कमियां निकाली थी। इन कमियो को अगले निरीक्षण से पहले पूरा करना था। मेडिकल कॉलेज के लिए फेक्लटी के साक्षात्कार हो गए परिणाम जारी हो गए लेकिन कॉलेज में नियुक्ति नहीं हो पाई। अटैच एसके अस्पताल में रेजीडेंट डाक्टर नहीं है, ओपीडी के पास वेटिंग रूम नहीं हैं, ओपीडी में जांच की सुविधा नहीं, प्लास्टर रूम और कटिंग रूम अलग-अलग नहीं, टीचिंग रूम की सुविधा नहीं है।