Video:वो सीमा पर भूूने गए, उन्हें भुना कोई ओर रहा…
हंसी का तराना, ठहाकों के पटाखे व व्यंग्य की फुलझडिय़ां। सब कुछ एक साथ, लेकिन अलग-अलग तेवर में। जब हंसी के फव्वारे छूटे तो उसकी बारिश से कोई भी अछूता नहीं रहा। क्या हुक्मरान, क्या मुलाजिम और क्या पुलिस। कोई कवियों के व्यंग्य बाणों के वार से बच नहीं पाया।