
Whistleblower Shashikant Suthar
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 एक बार फिर विवादों के सबसे गहरे भंवर में है। इस बार इस राष्ट्रीय स्तर की धांधली का केंद्र बना है राजस्थान का सीकर जिला, जिसे कोटा के बाद राजस्थान का दूसरा 'कोचिंग कैपिटल' भी कहा जाता है। सीकर के रहने वाले शशिकांत सुथार ने इस पूरे कथित पेपर लीक मामले में मुख्य व्हिसलब्लोअर (Whistle-blower) की भूमिका निभाते हुए जो खुलासे किए हैं, उसने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक में हड़कंप मचा दिया है।
शशिकांत सुथार के इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि परीक्षा के दिन यानी 3 मई को ही सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर हुबहू प्रश्न पत्र की पीडीएफ फाइलें तैर रही थीं।
सीकर के रहने वाले व्हिसलब्लोअर शशिकांत सुथार ने पूरी घटना का सिलसिलेवार ब्यौरा देते हुए बताया कि आखिर कैसे उनके हाथ यह सबसे बड़ा सबूत लगा।
शशिकांत ने बताया कि "3 मई को शाम 5:00 बजे जब नीट की परीक्षा समाप्त हुई, तो मैंने सामान्य तौर पर नीट के प्रश्न पत्र का विश्लेषण (Analysis) किया। पेपर का एनालिसिस करने के तुरंत बाद मैं अपने मकान मालिक से मिलने गया। वहां मेरे मकान मालिक ने मुझे अपने मोबाइल में एक तेजी से वायरल हो रही पीडीएफ (PDF) फाइल दिखाई। उन्होंने मुझसे बहुत ही साधारण तरीके से पूछा कि क्या इस पीडीएफ फाइल के अंदर जो प्रश्न दिख रहे हैं, वे आज की वास्तविक नीट परीक्षा में आए हैं या नहीं? मैंने जैसे ही उस पीडीएफ को खोलकर देखना शुरू किया, मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई।"
शशिकांत ने बताया कि जब उन्होंने उस रहस्यमयी और वायरल पीडीएफ के केमिस्ट्री (Chemistry) सेक्शन की बारीकी से जांच की, तो वे पूरी तरह से सन्न रह गए। उस पीडीएफ में वो सारे के सारे 45 प्रश्न बिल्कुल हुबहू (Verbatim) शब्द-दर-शब्द मौजूद थे, जो कुछ ही मिनट पहले समाप्त हुई नीट परीक्षा के मुख्य प्रश्न पत्र में छपे हुए थे।
शशिकांत ने आगे बताया, ''यह डरावना सच देखते ही मैं और मेरे मकान मालिक दोनों पूरी तरह से सदमे और शॉक की स्थिति में आ गए। हमें तुरंत अंदाजा हो गया कि यह कोई सामान्य बात नहीं है बल्कि देश के भविष्य के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ हो चुका है।"
शशिकांत ने आगे बताया, "इसके बाद मैंने अपने मकान मालिक से तुरंत पूछा कि क्या उनके पास ऐसी कोई और पीडीएफ फाइल भी आई है? इसके बाद उन्होंने मुझे बायोलॉजी (Biology) की पीडीएफ भी दिखाई। मैंने तुरंत एक शिक्षक की सहायता ली और हम दोनों ने मिलकर उस बायोलॉजी पीडीएफ के भीतर मौजूद सभी सामग्रियों और प्रश्नों का पूरा दस्तावेजीकरण (Documentation) करना शुरू किया ताकि हमारे पास पक्के सबूत रहें।"
इस भयानक पेपर लीक के सबूत हाथ में आने के बाद सीकर के इस जागरूक युवा ने जरा भी देर नहीं की। उन्होंने व्यवस्था के सोए हुए सिस्टम को जगाने के लिए रात में ही मोर्चा संभाल लिया।
प्रशासन को दी सूचना: शशिकांत और उनके साथियों ने 3 मई की देर रात को ही स्थानीय प्रशासन से संपर्क किया और मामले की औपचारिक रिपोर्ट दर्ज कराई।
केंद्रीय एजेंसियों को भेजे ईमेल: मामले को दबाने से बचाने के लिए उन्होंने उसी रात नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और भारत सरकार के केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) को आधिकारिक ईमेल के जरिए सारे सबूत, स्क्रीनशॉट और पीडीएफ फाइलों का विवरण भेज दिया।
शशिकांत सुथार ने इस पूरे मामले में केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों के त्वरित रिस्पॉन्स की जमकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर सरकारी सिस्टम धीमा चलता है, लेकिन देश के लाखों बच्चों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर एजेंसियों ने कमाल की फुर्ती दिखाई।
"मैं इन सभी केंद्रीय जांच एजेंसियों, विशेष रूप से सीबीआई और शिक्षा मंत्रालय का तहे दिल से आभार व्यक्त करना चाहता हूं। हमारे ईमेल और सबूत मिलते ही उन्होंने बेहद मुस्तैदी और तत्परता के साथ काम किया और त्वरित कार्रवाई (Swift Action) की। उनकी इस त्वरित कार्रवाई के कारण ही इस पूरे पेपर लीक और कदाचार (Malpractice) में शामिल बड़े माफियाओं और चेहरों को समय रहते बेनकाब किया जा सका, जिससे उनका यह काला सच आज पूरे देश और दुनिया के सामने आ चुका है।"
यह कोई पहली बार नहीं है जब राजस्थान का कोई शहर पेपर लीक या परीक्षा में धांधली को लेकर चर्चा में आया है। लेकिन नीट जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा का मुख्य व्हिसलब्लोअर सीकर से सामने आने के बाद अब राजस्थान की भजनलाल सरकार और स्थानीय पुलिस प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है।
छात्रों में भारी रोष: सीकर और कोटा में हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर दिन-रात पढ़ाई करते हैं। ऐसे में परीक्षा से पहले ही पीडीएफ वायरल होने की खबर ने छात्रों के मनोबल को तगड़ा झटका दिया है।
साफ है कि अगर 3 मई की रात को सीकर के इस युवा ने सूझबूझ न दिखाई होती और सबूतों को संभालकर सही समय पर सीबीआई व शिक्षा मंत्रालय तक न पहुंचाया होता, तो शायद यह बड़ा घोटाला फाइलों के नीचे ही दबा रह जाता। शशिकांत सुथार ने एक सच्चे नागरिक का फर्ज निभाया है, लेकिन अब जिम्मेदारी सरकार की है कि वह यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में देश के सबसे बड़े मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट की पवित्रता से कोई भी माफिया इस तरह खिलवाड़ न कर सके।
Published on:
20 May 2026 08:13 am
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