
देवेंद्र शर्मा शास्त्री, सीकर
सऊदी अरब सरकार की नई रोजगार नीति ने भारतीय कामगारों की मुसीबत बढ़ा दी है। क्योंकि सऊदी अरब सरकार की ओर से तैयार प्रस्ताव में स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता देने की योजना तय की है।
बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी
सऊदी सरकार की नई नीति के अनुसार वहां किराना, दूध, ब्रेड व आवश्यक वस्तुओं और अन्य उत्पादों से जुड़ी किसी भी दुकान पर भारतीय काम नहीं कर पाएंगे। एेसे में कई कंपनियों ने भारतीय कामगारों को बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी कर ली है।
शेखावाटी के लोगों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
यदि यह नीति जल्द लागू होती है तो सबसे ज्यादा असर शेखावाटी के लोगों पर पड़ेगा। यहां के चार लाख से अधिक लोग सऊदी में कार्यरत हैं। भारतीय कामगारों की खाड़ी से लगातार दूरी होती जा रही है। यहां से खाड़ी जाने वालों की संख्या में 50 फीसदी तक गिरावट पहले ही हो गई है। सऊदी सरकार की ओर से जारी आंकड़े इसके प्रमाण है। वर्ष 2013 में भारत से महज एक लाख 65 हजार 356 कामगार सऊदी अरब गए।
दस दिन पहले इस संबंध में आदेश भी जारी
सऊदी श्रम एवं सामाजिक विकास मंत्रालय की ओर से बनाए गए मसौदे के अनुसार वहां की सरकार विजन २०३० को लेकर काम कर रही है। इसके तहत आवश्यक उत्पादों से जुड़ी किसी भी दुकान पर सौ फीसदी सऊदी कामगार होना आवश्यक है। वहां की सरकार ने दस दिन पहले इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया है।
कंपनियां बंद...
सऊदी के जेद्दा में स्थित भारतीय दूतावास में चार वर्ष तक कम्यूनिटी वेलफेयर काउंसलर का पद संभाल चुके जयुपर के पासपोर्ट अधिकारी विवेक जैफ का कहना है कि बिन लादेन कंपनी के बंद होने से यहां के दस हजार से ज्यादा कामगार बेरोजगार हो गए थे। इसके बाद सऊदी में कई कंपनियां बंद हो गई। कई बरसों से विदेशी कामगारों के लिए काम कर रहे के.के.वेलफेयर सोसायटी के गुलाम मोहम्मद बेसवा ने बताया कि वहां सऊदी में भारतीय कामगारों का पहले सौ फीसदी कोटा होता था।
Updated on:
07 Aug 2017 10:37 am
Published on:
07 Aug 2017 09:01 am
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