
प्रतीकात्मक तस्वीर
Holi 2025: देशभर में होली का त्योहार हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है। होलिका दहन के बाद हर ओर रंग व गुलाल की मस्ती छाई हुई है। लेकिन, एक गांव ऐसा भी है जहां ना तो होलिका दहन हुआ और ना ही रंग रंगीली धुलंडी खेली जा रही है। जी, हां सीकर के नीमकाथाना का आगरी व गणेश्वर सहित करीब 10 गांव ऐसे हैं जहां एक समाज में करीब 500 साल से होली नहीं मनाई जा रही। आलम ये है कि होलिका दहन तक को देखना तक यहां अशुभ माना जाता है। रंग- गुलाल को तो कभी हाथ तक नहीं लगाया गया।
गणेश्वर गांव को बसाने वाले गालव गंगा तीर्थ धाम के कुंड की स्थापना करने वाले राजपूत समाज में जन्मे बाबा रायसल व यादव समाज मे जन्मे कनिनवाल गौत्र में हरनाथ यादव के साथ विवाह बंधन में बंधी तुलसा देवी में ईश्वरीय भक्ति भावना कूट कूट कर भरी हुई थी। तुलसा देवी गालव तीर्थ धाम की पूजा अर्चना करती थी। इन्हीं तुलसा देवी का देवलोकगमन होली के दिन हो गया था। इसके बाद कनिनवाल परिवार के लोगों ने तीर्थ धाम पर तुलसा माता का मंदिर बनवाया। साथ ही इस दिन होली नहीं मनाने का फैसला हुआ। तब से आसपास के 10 गांवो में बसे कनिनवाल गौत्र परिवार के लोग होलिका दहन नही देखते हैं। ना ही धुलंडी खेलते हैं।
धुलंडी के दिन गांव गणेश्वर को बसाने वाले बाबा रायसल का राज तिलक हुआ था। ऐसे में आगरी व गणेश्वर के सर्वसमाज के लोग धुलंडी के दिन रंग गुलाल से दूर रहते हैं। इस दिन बाबा रायसल का वार्षिक डूडू मेला भरता है। आगरी व गणेश्वर के ग्रामीण बाबा रायसल दरबार में जाकर पूजा अर्चना कर खुशहाली की मन्नत मांगते हैं।
Published on:
14 Mar 2025 12:08 pm
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