
पुलिस थाने में एक साथ इतने वाहनों को देखकर हर कोई रह गया हैरान, जानिए क्या है वजह
सीकर.
सडक़ हादसों में अपनों की मौत पर आंसू और घायलों की कराहट के बाद इनके परिजनों की संपति थानों में खड़ी कबाड़ होती जा रही है। स्थिति यह है कि जिलेभर के पुलिस थानों में जब्त 831 छोटे-बड़े वाहन वर्तमान में धूल फांक रहे हैं। पुलिस की लीपापोती और परिजनों की अनदेखी के इनके पुर्जे जंग खा रहे हैं और कई कीमती और नए वाहन एक ही जगह खड़े अपनी बदहाली का रोना रो रहे हैं।
पुलिस नहीं देती ध्यान
थानों में खड़े सर्वाधिक वाहन 186 वाहन दुर्घटना के मामलों में थाने लाकर छोड़े गए हैं। इनमें अधिकतर वाहन तो कबाड़ का रूप ले चुके हैं। अपनों की मौत का गवाह होने के कारण मालिक भी इनकी तरफ कम ही ध्यान दे रहे हैं। कई वाहन तो ऐसे हैं। जिनको वर्षों बीत जाने के बाद यहां खड़ा करने के बाद कोई इन्हें लेने नहीं आया है। हादसे के बाद पुलिस की प्रमुखता भी मौके से वाहन हटाकर थाने भिजवाने और यातायात सुचारू करने तक सीमित रहती है। दुर्घटना बड़ा अपराधिक मामला नहीं होने के कारण पुलिस भी इनकी तरफ गंभीरता से ध्यान नहीं देती है और वाहनों का कबाड़ में तब्दील होना आर्थिक हानि के तौर पर परिजनों को भुगतना पड़ता है।
ज्यादा बाइक
हादसे के बाद मालिक को कोर्ट के जरिए वाहन छुड़ाना होता है। लेकिन, जिले के थानों में वर्तमान में सडक़ हादसों में क्षतिग्रस्त हुई 115 बाइक जब्त खड़ी है। इससे साफ जाहिर होता है कि सर्वाधिक दुर्घटना भी बाइक से हो रही है। इनमें मौत और घायलों के आंकड़े में भी बाइक सवार ही हादसों में ज्यादा हताहत हुए हैं।
जगह का अभाव
थानों में वाहनों की खड़ी भीड़ के कारण जगह का अभाव हो रखा है। स्थिति यह है कि पुलिस को कई जगह तो बाहर तारबंदी कर इन वाहनों को खड़ा करना पड़ रहा है। लेकिन, कानून प्रक्रिया पूरी नहीं होने से पहले पुलिस की मजबूरी है कि वह इन वाहनों को नीलाम भी नहीं कर सकती है।
Published on:
25 May 2018 08:35 am
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