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अगर यहां वारदात हुई तो एक घंटे से पहले पुलिस पहुंच ही नहीं सकती !, आपको ही पकडऩा पड़ेगा आरोपियों को

वारदात होने के बाद घंटे से पहले नहीं पहुंच सकती सीकर पुलिस

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सीकर.

सीकर पुलिस के विस्तार की मुहिम कागजों में दबी है। थाने चौकी खोलने के प्रस्ताव पर दो वर्ष बाद भी सरकार की मोहर नहीं लग पाई है। ऐसे में जिले के कई क्षेत्र ऐसे है, जहां वारदात होने पर थाने की पुलिस एक घंटे से पहले मौके पर पहुंच ही नहीं सकती। सर्वाधिक स्थति लोसल थाना क्षेत्र की है। सीकर से डीडवाना (नागौर) पालवास होकर जाने वाले रास्ते में कहीं भी पुलिस का थाना तो दूर चौकी भी नहीं है। इस मार्ग पर लोसल और नेछवा थाने लगते है, लेकिन दोनों ही थानों की दूरी लगभग 20 किलोमीटर दूर है। इसके अलावा शहर के चारों तरफ बनी बाइपास पर पुलिस की जांच की कोई स्थाई व्यवस्था नहीं है।


सरकार के पास अटके हैं थाने चौकियों के प्रस्ताव


सीकर जिले में बढ़ते अपराध को रोकने के लिए सरकार को दो एएसपी, छह पुलिस थानें व पांच पुलिस चौकी खोलने के लिए प्रस्ताव भेजे गए थे। लेकिन सरकार की और से प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिलने पर अटका हुआ है। प्रस्ताव में चीपलाटा, तोदीनगर, डाबला, धोद, रसीदपुरा व जाजोद में पुलिस थाना खोलने, खंडेला, धोद व दांता में डीवाईएसपी कार्यालय तथा पलसाना, बस डिपो सीकर, जीणमाता, एसके कॉलेज व रींगस कस्बा में पुलिस चौकी खोलना तय किया गया था। इसके अलावा दो नए एएसपी कार्यालय खोलने के प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन है।


थाने बना दिए, क्वार्टर नहीं


सीकर पुलिस के वर्ष 2014 से अब पुलिस के विस्तार पर नजर डाले तो महिला थाना, दादिया, उद्योगनगर और बलारां थाने का भवन नया बना है। भवन तो सरकार की और से स्वीकृत नक्शे के आधार पर बनाए गए हैं, लेकिन इनमें थानाधिकारियों और पुलिसकर्मियों के रहने के लिए एक भी क्वार्टर नहीं बनाया गया है।
नए थाने और चौकी खोलने के प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन है। जिले के विस्तार के साथ पुलिस का भी विस्तार आवश्यक है। वर्तमान संशाधनों के आधार पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। -डॉ. तेजपाल ङ्क्षसह, अपर पुलिस अधीक्षक, सीकर