
पितरों की फोटो और रुपये भेजो, आपकी जगह कोई ओर कर देगा गया श्राद्ध
सीकर. कल यानी शुक्रवार से श्राद्ध पक्ष शुरू हो जाएंगे। घर घर पितृ पूजा और श्राद्धकर्म होंगे। पितृ तर्पण के लिए लोग गया सरीखे तीर्थ स्थलों पर जाएंगे। इस बीच कुछ ‘पोर्टल पंडितों’ ने आस्था का भी ऑनलाइनकरण कर दिया है। पोर्टल वाराणसी, इलाहबाद और गया श्राद्ध ऑनलाइन करने का दावा कर रहे हैं। इसके लिए आपको पितरों की फोटो और सामान्य जानकारी के साथ बताए गए बैंक एकाउंट में पूजा और दक्षिणा की राशि जमा करानी होगी। जिसके बाद यह पोर्टल पूरी पूजा सामग्री और विधि विधान से श्राद्ध कर्म और पिंडदान करने का दावा करते हैं। सबूत के तौर पर श्राद्धकर्म के फोटोग्राफ और सीडी बनाकर भेजने की बात भी कही जा रही हैं। लेकिन, ऑनलाइन श्राद्धकर्म की इस प्रक्रिया पर स्थानीय पंडितों ने आपत्ति जता दी है। शास्त्र विरुद्ध बताते हुए इससे बचने की सलाह भी दी है।
दूसरा कर देगा पिंड दान, पांच लाख तक का खर्च
ऑनलाइन श्राद्ध कर्म के लिए पितृ मोक्ष जैसे कई वेब पोर्टल हैं। परिजन को समय नहीं होने पर यह किसी दूसरे शख्स से श्राद्ध कराने का दावा करते हैं। परिजन खुद नहीं पहुंचे तो पैकेज ज्यादा सस्ता है। जो 15 हजार रुपए से शुरु है। श्राद्धकर्ता खुद श्राद्ध स्थल पर जाना चाहे तो उसकी बस, ट्रेन या एयर टिकट से लेकर होटल में ठहरने तक के अलग पैकेज हैं। दान- दक्षिणा के हिसाब से यह पांच लाख तक हो सकता है। वेबसाइट पर दिए नम्बरों पर बात करने पर कुछ पंडित पैकेज की जगह पूजा सामग्री की राशि और श्रद्धा से दक्षिणा की बात भी कहते हैं।
कम्यूनिटी के हिसाब से कोई ओर करेगा पूजा
वेब पोर्टल पर कम्यूनिटी के हिसाब से श्राद्धकर्म करने का भी जिक्र है। यानी पंजाबी, मारवाड़ी, हरियाणवी सभी की अलग अलग परंपराओं के आधार पर पूजा कर्म किए जाएंगे। ऑनलाइन श्राद्धकर्म करने वाली संस्थाएं श्राद्ध के लिए बैंक एकाउंट में एडवांस राशि मांगती है। इसके साथ मृतक का नाम, फोटो, मृत्यु के समय उम्र, मृत्यु का समय, स्थान और कारण और श्राद्धकर्ता का रिश्ता सरीखी जानकारी मांगी जा रही है।
परिजनों के तर्पण से ही होता है पितृ मोक्ष: पंडित दिनेश मिश्रा
ऑनलाइन श्राद्ध कराने वाले पोर्टल को स्थानीय पंडितों ने शास्त्र विरोधी करार दिया है। पंडित दिनेश मिश्रा का कहना है परिजनों के अलावा किसी अन्य से श्राद्ध कराना शास्त्र के खिलाफ है। गया श्राद्ध पुत्र, पौत्र, प्रपोत्र या नाती द्वारा किये जाने का विधान है। किसी अनजान द्वारा श्राद्ध करना सही नहीं है। शास्त्रों के मुताबिक भगवान राम ने भी पिता दशरथ का पिंडदान खुद अपने हाथों से किया था। जिसे लेने खुद दशरथ जी का हाथ आया था। परिजनों के पिंडदान से ही पितृ मोक्ष होता है।
बेटे और पोते का कर्तव्य है श्राद्ध: पंडित नितेश शर्मा
पंडित नितेश शर्मा ने बताया कि श्राद्ध कर्म और पितृ तर्पण का पहला हक और कर्तव्य बड़े बेटे का होता है। इसके बाद बाकी बेटों, पोतों और नाती यह कर्म कर सकते हंै। यदि किसी परिवार में यह कोई रिश्तेदार नहीं, तो विशेष परिस्थिति में ही किसी दूसरे को इस निमित नियुक्त कर श्राद्ध कराया जा सकता है।
Published on:
12 Sept 2019 11:09 am
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