
सीकर.
रेल बजट 2018 को लेकर सीकर को बड़ी उम्मीदें हैं। यहां का सूना ट्रेक गाडियां मांग रहा है। सीकर-जयपुर ट्रेक पर धीमी रफ्तार से चल रहे ब्रॉडगेज कार्य को बजट की आशा है। रेलवे के विकास में पिछड़े सीकर जिले के लिए यह बजट बड़ा महत्वपूर्ण हैं। बजट में इस बार नई गाडिय़ों की घोषणा नहीं होने पर विकास की रफ्तार अधिक धीमी हो जाएगी। नई गाडिय़ां चलने पर यहां के सैनिकों, छात्रों के साथ आम आदमी को गहरा फायदा होगा। पत्रिका ने इस मुद्दे पर को लेकर प्रमुख लोगों की राय जानी तो सभी ने तैयार ट्रेक पर नई गाडिय़ों की मांग रखी। साथ ही यहां की जनता सीकर-जयपुर ट्रेक का कार्य जल्द पूरा करवाना चाहती है।
10 वर्ष पहले स्वीकृत ब्रॉडगेज अभी नहीं पूरी
सीकर के रेल विकास की स्थिति पर नजर डाली जाए तो वर्ष 2007 में स्वीकृत बॉडगेज का काम अभी तक पूरा नहीं हुआ है। उस दौरान कार्य वर्ष 2014 में पूरा करने की बात कहीं गई थी, लेकिन सरकार बदलने के बाद कार्य की प्रकृति भी बदल गई। कार्य की डीपीआर तीन फेज में तैयार की गई। सीकर-लोहारू, सीकर-चूरू और सीकर-जयपुर। सीकर लोहारू और सीकर-चूरू ट्रेक का कार्य पूरा हो गया है। करीब साढ़़े पांच सौ करोड़ रूपए खर्च करने के बाद भी जनता को अभी तक रेल सेवाओं का पूरा फायदा नहीं मिल पाया है।
जम्मू ट्रेन चले तो सैनिकों को हो फायदा
सीकर-चूरू ट्रेक पर जम्मू के लिए रेल चलाई जाए तो यहां के सैनिकों को बड़ा फायदा होगा। कारण कि इस इस मार्ग पर 26 सैनिक छावनियां है। शेखावाटी क्षेत्र के हजारों सैनिक इन छावनियों में तैनात है। इसके अलावा गंगानगर-सादुलपुर ट्रेन को भी सीकर तक चलाया जा सकता है।
दिल्ली के लिए प्रतिदिन शाम को चाहिए ट्रेन
सीकर की जनता की पहले दिन से प्रतिदिन शाम के समय दिल्ली के लिए गाड़ी चलाने की मांग रही है। जनता की मांग को देखते हुए दिल्ली के लिए शाम की गाड़ी शुरू भी की गई, लेकिन अभी तक सप्ताह में तीन दिन ही चलाई जा रही है। यहां के जनप्रतिनिधियों ने कई बार प्रतिदिन गाड़ी चलवाने का आश्वासन दिया है, लेकिन रेलवे अधिकारियों के पास अपनी मांग मजबूती से नहीं रख पाने के कारण आज तक वे गाड़ी चलवाने में सफल नहीं हो पाए। जबकि मीटरगेज के दौरान सीकर से दिल्ली के लिए प्रतिदिनि ट्रेन चलाई जाती थी।
पूर्व सैनिक व गौरव सेनानी शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री गोवर्धन गोदारा का कहना है कि बजट में सैनिकों के लिए साल में दो बार निशुल्क ट्रेन यात्रा की घोषणा की जानी चाहिए। इसके अलावा दिल्ली से सीकर के लिए सुबह और शाम दोनों समय ट्रेन की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
बढऩी चाहिए सुविधाएं...
गृहिणी ममता सैनी ने बताया कि ट्रेन की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ उनमें महिला यात्रियों के लिए अलग से कोच की व्यवस्था हो जो कि, एसी रहित ना हो। ताकि महिलाएं भी अपनी यात्रा सुरक्षा पूर्वक कर सके।
पूर्व सैनिक वर्तमान में कल्याण संघठक के पद पर कार्यरत साबूलाल चौधरी के अनुसार जिले में सबसे अधिक सैनिकों की संख्या को ध्यान में रखते हुए ज्यादा से ज्यादा ट्रेन चलाई जानी चाहिए। क्योंकि सीकर से दिल्ली के बीच ऐसे कई स्टेशन और ठहराव हैं। जहां शेखावाटी के हजारों सैनिक कार्यरत हैं।
दिनेश जाखड़ ने बताया कि सीकर में रेलवे का विकास खरगोस की तरह हो गया है। जनप्रतिनिधि घोषणा तो कर रहे है, लेकिन क्रियान्विति का धरातल कमजोर है। सीकर में मीटरगेज के समय करीब 26 ट्रेन चलती थी, लेकिन आज यह आंकड़ा छह पर अटका है। ऐसे में इसे रेलवे का विकास नहीं कहा जा सकता।

Published on:
01 Feb 2018 10:43 am
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