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त्रिपुरा के बाद राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस नेताओं की इन बातों से उड़ सकती है राहुल गांधी की नींद

त्रिपुरा चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह हारी है। सीकर कांग्रेस के कई नेताओं की वंशवाद की बेल Rajasthan Assembaly Election 2018 में मुश्किल बढ़ा सकती है।

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Rajasthan Assembaly Election 2018

Rajasthan Assembaly Election 2018

पूरण सिंह शेखावत/सीकर.

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में वंशवाद की राजनीति राजस्थान कांग्रेस में बड़ा भूचाल ला सकती है। वंशवाद की अमरबेल के सहारे कई युवा चुनाव मैदान में ताल ठोक कर दिग्गजों के पसीने लाने के लिए तैयारी में है। युवाओं को मौका देने का दावा करने वाली कांग्रेस में दिग्गज नेता परिवारवाद की अमरबेल को ही मजबूत करने में जुटे हुए हैं। उम्र के नाम पर टिकट कटने की संभावना पर यह दिग्गज नेता भी Rajasthan Assembaly Election 2018 में अपनी दूसरे पीढ़ी को आगे बढऩे का मौका दे सकते हैं।

इन दिग्गज नेताओं में विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सहित कई पूर्व मंत्री शामिल है। जो कि अपने परिवार के लोगों को ही आगे बढ़ाने में जुटे हुए हैं जबकि इन दिग्गजों की दूसरी पीढ़ी का धरातल बेहद कमजोर रहा है और पहले भी चुनाव में हार का सामना कर चुके हैं।

दांतारामगढ़ में बेटे व बहू पर दांव खेल सकते है सिंह


दांतारामगढ़ विधानसभा के विधायक नाराणसिंह ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी का निर्वहन किया है। लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय नारायण सिंह की मजबूत पकड़ मानी जाती है। प्रदेश में पिछले विधानसभा चुनावी लहर में भी कांगे्रस की टिकट पर निर्वाचित होने के बाद नारायण सिंह का जनाधार बढ़ा है। इससे पहले जिले में अपने परिवार का दावा मजबूत करने के लिए नारायण सिंह ने बेटे वीरेन्द्र सिंह को दांतारामगढ़ प्रधान व पुत्रवधु रीटा सिंह को जिला प्रमुख बनवाया।


कांग्रेस जिलाध्यक्ष की दौड़ में भी वीरेन्द्र सिंह शामिल रहे है। राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में युवाओं को तरजीह की बात पर नारायण सिंह अपने बेटे व बहू में से किसी भी एक की टिकट के लिए जमकर पैरवी कर सकते हैं। दांतारामगढ़ कस्बे में माकपा और भाजपा की तुलना में कद्दावर नेता ही कांग्रेस की नैया यहां पार लगा सकता है।

बेटे का मिली टिकट, परिवारवाद का लगा ठप्पा

खंडेला विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस में लंबे समय से सक्रिय पूर्व मंत्री महादेव सिंह खंडेला के ईद-गिर्द ही कांग्रेस की राजनीति घूमती रहती है। महादेव सिंह खण्डेला के सांसद रहने पर उन्होंने पत्नी पार्वती को खंडेला प्रधान तथा बेटे गिर्राज सिंह को विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर विधायक का चुनाव लड़वाया था। खंडेला पर परिवारवाद का ठप्पा लगने की चर्चा होने के साथ ही जनता ने बेटे को विधानसभा में चुनाव हरा दिया तो सांसद चुनावों में महादेवसिंह की टिकट काट दी गई। हालांकि महादेव सिंह क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे है। कांग्रेस में टिकट के समय नए मापदंड व युवाओं को आगे लाने की बात पर राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में महादेव सिंह अपने बेटे को टिकट दिलाने की जुगत में पूरा जोर लगाएंगे।

फतेहपुर में महरिया की दावेदारी

कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय पूर्व मंत्री रामदेव सिंह महरिया का परिवार भी राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में टिकट के लिए फतेहपुर में मजबूत दावेदार है। फतेहपुर से वर्तमान में निर्दलीय विधायक नंदकिशोर महरिया यहां कांग्रेस से प्रमुख दावेदार माने जा रहे है। हालांकि इसी परिवार से कांग्रेस में पूर्व मंत्री सुभाष महरिया भी सक्रिय है। विधानसभा चुनावों में सुभाष महरिया भी अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर सकते है। इसी तरह पूर्व विधायक भंवरू खां का भाई हाकम खां भी परिवारवाद की तर्ज ही क्षेत्र में कांग्रेस की दावेदारी सकते हैं।

दादा के बाद बेटा व पोता सक्रिय

नीमकाथाना विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय से कांग्रेस की टिकट से प्रतिनिधित्व करने वाले मोहन मोदी के बेटे सुरेश मोदी ने परिवारवाद की तर्ज पर यहां कांग्रेस में सक्रिय है। इसी परिवार से अंतरिक्ष मोदी भी कांग्रेस में खासे सक्रिय है। ऐसे में अपने परिवार की क्षेत्र में मजबूत पकड़ के सहारे यह भी राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में कांगे्रस में परिवाद का नाम पर दावेदारी जताएगे।

कई युवा सक्रिय, लेकिन नहीं मिला मौका

नए चेहरों को मौका दिए जाने के कांग्रेस के आलाकमान हर बार दावे करते हैं लेकिन दिग्गज नेताओं के परिवाद को बढ़ावा देने के कारण हर बार पुराने चेहरों को ही टिकट दिए जा रहे हैं। इस कारण युवा हर बार वंचित रह जाते हैं। खंडेला क्षेत्र में युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सुभाष मील व सेवादल के प्रदेश नेता हरि सिंह रूंडला सक्रिय है। दांतारामगढ में ऑल इंडिया यूथ कांग्रेस के महासचिव सीताराम लाम्बा की युवाओं पर अच्छी पकड़ रही है। इसके बावजूद पार्टी की ओर से आज तक टिकट नहीं दिया जा सका है।

अब बेटे के लिए मशक्कत


श्रीमाधोपुर विधानसभा में भी कांग्रेस की ओर से लंबे समय से प्रतिनिधित्व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह शेखावत ने किया है। पिछले चुनाव से पहले ही दीपेन्द्र ने बेटे बालेन्दू सिंह को भी युवक कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय कर दिया। बाद में कांग्रेस में प्रदेश पदाधिकारी में पद दिलाने व प्रदेश समन्वय समिति में सदस्य बनाने में कामयाबी हासिल की।

हालांकि दीपेन्द्र सिंह शेखावत राजस्थान विधानसभा का वर्ष 2013 का चुनाव हार गए, इसके बाद भी क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे। उम्र की बाध्यता की बात सामने आने पर दीपेन्द्र सिंह शेखावत भी बेटे को टिकट दिलाने में पूरा जोर लगा सकते है। कांग्रेस में दीपेन्द्र सिंह के मुकाबले क्षेत्र में किसी अन्य नेता का ज्यादा जनाधार नहीं माना जाता है।