
सीकर. सात फेरों के लिए ना मंडप, ना मंत्रोच्चार के लिए पंडित। ना घोड़ी और न ही कोई बैंडबाजा। केवल 17 मिनट 33 करोड़ देवी-देवीताओं की स्तुति हुई और दोनों बंध गए शादी के बंधन में। बिना सजावट, बनावट और दिखावट के दुर्गादास कॉलोनी सीकर में हुई इस अनूठी शादी को देखकर हर कोई हैरत में था। लेकिन, फिजुल खर्ची व दहेज जैसी कुरीति को त्यागने का जो संदेश यहां देखने को मिला। उससे हर कोई खुश नजर आया।
हर कोई यही कहता दिखा कि यदि सभी जगह ऐसा होने लगे तो दहेज के कारण ना किसी की बेटी जलेगी और न ही किसी बहू को शर्मिंदा होना पडेग़ा। हालांकि शादी के गवाह बने लोगों ने इसके बाद दुल्हन आनंद कंवर शेखावत व दूल्हे दीपेंद्र सिंह सहित इन दोनों के पिता उम्मेद सिंह व जीवण ङ्क्षसह को शाबासी भी दी कि दोनों परिवारों के इस अनूठे संकल्प से केवल 17 हजार रुपए में शादी हो गई। अन्यथा दोनों परिवारों के लाखों रुपए दिखावे में खर्च हो जाते।
मिठाई की जगह दाल-रोटी
राजसमंद के समीचा से बारात में आए बारातियों को भी मिठाई के बदले सादा दाल-रोटी परोसी गई। नाश्ते में रसगुल्ले व राजभोग की जगह चाय-बिस्किट खिलाए गए। बारात में शामिल होने आए विनोद व केशर सिंह इस तरह की खातिरदाई से खुश नजर आए उनका कहना था कि जीवन में बहुत शादी-समारोह में गए हैं। लेकिन, सादगी और सजिंदगी वाली इस शादी का कोई जवाब नहीं है।
गहने नहीं गुण चाहिए
दूल्हे के पिता जीवण सिंह के अनुसार बहू में गुण होने चाहिए गहने तो बाजार में भी मिल जाया करते हैं। दुल्हन के पिता उम्मेद सिंह का कहना था कि हंसी उड़ाने वाला समाज सराहना करने लगे तो शादी के सारे संस्कार पूरे हो जाते हैं।
दुल्हन एमएसी, दूल्हा बीए
एमएसी कर रही दुल्हन आनंद कंवर व बीए की पढ़ाई पूरी कर रहे दूल्हे दीपेंद्र का मानना था कि शादी कोई समझौता नहीं होती कि उसमें कोई लेन-देन करना पड़े। बल्कि दो परिवारों का मिलन होता है। जिसमें लेने देने का दिखावा जरूरी नहीं होता है। जबकि झूठे दिखावे व फिजुल खर्ची के कारण कई परिवार बाद में बर्बाद तक हो जाते हैं।
Updated on:
21 Feb 2018 07:25 pm
Published on:
21 Feb 2018 06:20 pm
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