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अमीर बनाने का सपना दिखाकर लोगों को फंसाते, 5 महीने से युवक-युवतियों को कमरे में बना रखा था बंधक

रेटीकेट चिटफंड कंपनी ( Raticate Chit Fund Company Sikar Fraudulent With People Exposed ) के रोजाना चौंकाने वाले खुलासे हो रहे है। कंपनी निदेशकों ने फेसबुक, यूटयूब जैसी सोशल मीडिय़ा साइटों पर पेज बनाकर युवाओं को झांसे में लिया।

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कंपनी अमीर बनाने का सपना दिखाकर लोगों को फंसाती, पांच महीने से युवक-युवतियों को कमरे में बना रखा था बंधक

कंपनी अमीर बनाने का सपना दिखाकर लोगों को फंसाती, पांच महीने से युवक-युवतियों को कमरे में बना रखा था बंधक

सीकर.

रेटीकेट चिटफंड कंपनी ( Raticate Chit Fund Company Sikar Fraudulent to People Exposed ) के रोजाना चौंकाने वाले खुलासे हो रहे है। कंपनी निदेशकों ने फेसबुक, यूटयूब जैसी सोशल मीडिय़ा साइटों पर पेज बनाकर युवाओं को झांसे में लिया ( Fraudulent on Social Media Sites )। राजस्थान पत्रिका ने पूरे मामले का सच जानने के लिए ठगी के शिकार युवाओं से बातचीत की। कंपनी का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद सोमवार को झारखंड, मध्यप्रदेश, हरियाणा सहित देश के कई हिस्सों से ठगी के शिकार सामने आए। सोशल मीडिया के जरिए इन बेरोजगार युवकों को 15 से 20 हजार रुपए महीने में नौकरी देने का झांसा देकर सीकर बुलाया था। इनको पिछले 5 महीने से बंधक बनाकर कमरे में रखा गया था।

परिजनों से फोन पर भी बात नहीं करने देते थे। एक-एक कमरे में पांच से छह युवतियों व युवकों को डऱा-धमका कर रखा जाता था। हैरानी की बात है कि 18 से 25 साल के आसपास अधिकतर युवक व युवतियां ठगी के शिकार हुए है। इन्हें जल्द से जल्द से अमीर बनने का सपना दिखाया गया। दो दर्जन से अधिक युवतियों और युवकों ने ठगी की शिकायत दी। वहीं पुलिस ने सोमवार को रेटीकेट कंपनी के निदेशक अंकुश को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस पूरे मामले की कड़ी से कड़ी जोडकऱ जांच में जुटी है। पुलिस ने कंपनी के अन्य कार्यालयों में भी दबिश देकर जांच शुरु की है।

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दो साल पहले शुरुआत
कंपनी के निदेशक अंकुश ने 2017 में पंजाब से शुरुआत की। सबसे पहले उन्होंने फेसबुक साइट पर रेटीकेट फैशन माल के नाम से पेज बनाया। युवाओं को पेज पर ही नौकरी के लिए बताया गया। उन्हें आकर्षक वेतन देने का लालच देकर फंसाया गया। कंपनी की तीन ब्रांच हल्द्वानी, उतराखंड व जिरकपुर में एक साथ खोली गई। इसके बाद एक साल पहले कंपनी ने सीकर में शुरुआत की। यहां पर भी नए-नए युवाओं को 15-20 हजार रुपए में नौकरी करने का झांसा देकर बुलाया गया। उन्हें पहले कंपनी के प्रोडक्ट की दो हजार रुपए लेकर चार दिनों तक ट्रेनिंग दी गई। बाद में उन्हें रेटकेट कंपनी के कपड़ों को चेन सिस्टम बनाकर बेचने के बारे में बता गया। कंपनी की जल्द ही जयपुर और जोधपुर में भी आफिस खोलने की योजना थी।


मेंबर बनाने पर 1 से 3 लाख रुपए महीने के साथ कार व आईफोन
रेटीकेट कंपनी ने युवाओं को लालच देकर कई स्कीमें बनाई थी। पहली कड़ी 20 नंबर एफआर से शुरुआत थी। 8000 रुपए के साथ जीएसटी लगाकर 10 हजार रुपए लेते थे। पांच मेंबर जोडऩे पर प्रति सदस्य 1600 रुपए दिए जाते थे।


5 मेंबर होने पर उन्हें 29 नंबर एल्फा में शामिल करते थे। दूसरी कड़ी 29 नंबर एल्फा में 40 हजार के साथ जीएसटी लगाकर 46000 रुपए लेते थे। इसमें सीधे इंट्री भी ले सकते थे। 5 मेंबर जोडऩे पर 12600 रुपए प्रति मेंबर और 38 किंगलेट में शामिल करते थे। तीसरी कड़ी 38 किंगलेट में 15 लाख रुपए बिजनेस का टारगेट रखा था। एल्फा के 5 मेंबर जोडऩे पर 30 से 60 हजार रुपए महीने दिए जाते थे। चौथी कड़ी में आर-41 में किंगलेट के 5 सदस्यों को जोडऩे पर 1 से 3 लाख रुपए महीने और आरटीआर बाइक व बोलेनों गाड़ी देने की बात कहते थे। 42-क्राउन डयूक अंतिम कड़ी थी। कंपनी को आर-41 के 5 सदस्य देने पर 10 से 13 लाख रुपए महीने और थाईलेंड, मलेशिया घूमने के लिए परिवार के साथ 7 दिन का ट्यूर की घोषणा करते।

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परिवार में मौत होने पर भांडा फूटने के कारण गांव जाने नहीं दिया
मध्यप्रदेश ग्वालिया से आई हीराबाई ने बताया कि उसे 30 हजार रुपए महीने का लालच देकर 5 महीने पहले बुलाया था। उसने काम से मना कर दिया तो कमरे में ही बंधक बनाकर रखते थे। नाना की मौत होने पर भी उसे जाने नहीं दिया गया। झारखंड से शिवबियानी ने बताया कि उसे 4 महीने पहले बुलाया था। 46 हजार रुपए ले लिए। खाने के पैसे तक नहीं है। घर जाने के लिए किराया भी नहीं है। डऱा-धमका कर रखते थे।


शिश्यूं से श्रवण, नवलगढ़ से अंकित, झुंझुनूं से अनीता, हरदयालपुरा से उपेंद्र चौधरी, नीमकाथाना से विकास सहित अन्य युवाओं ने बताया कि उनसे जीएसटी लगाकर 46 हजार रुपए लिए गए। आपस में किसी से बात नहीं करने देते थे। पहले नौकरी के लिए बुलाया था, बाद में कपड़ों का बिजनेस की स्कीम बताई। दो हजार रुपए कमरों में रुकने के लेते थे। लिखित में उन्हें कुछ नहीं देते थे। सभी परेशान हो जाते थे तो मॉल में पिक्चर दिखाने के लिए ले जाते थे। कभी जन्मदिन की बात बोलकर आफिस में ही पार्टी करते थे।


ट्रेनिंग का काम भी बांट रखा था
कंपनी की सीईओ अनीता रानी थी। सीकर ब्रांच में निदेशक अंकुश कभी-कभी आता था। सीकर ब्रांच से 5 दिनों में 5 से 6 लाख रुपए हर महीने जमा कराए जाते थे। नए युवाओं को लाने और रुपए कलेक्शन का काम विक्रम करता था। अवतार को ब्रांच का मैनेजर रखा था। मीका सिंह एजेंटों के साथ काम करता था। इन चारों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इसके अलावा ओमप्रकाश,जेठाराम, भरत,आकाश व कैलाश मिलकर ट्रेनिंग देते थे और स्कीमों के बारे में बताते थे। फिलहाल ट्रेनिंग देने वाले शातिर बदमाश फरार है। पुलिस के पास रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद हरियाणा के रहने वाले आनंद को धमकी दी जा रही है।

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