
सीकर.
राजस्थान का हाइटेक जिला और कोचिंग हब सीकर शहर बारूद के ढेर पर बैठा है। यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। कारण घनी आबादी क्षेत्र में रसोई गैस गोदाम होना है। खास बात ये है इनमें से एक रसोई गैस एजेसी से कुछ मीटर की दूरी पर पैट्रोल पम्प और रेलवे स्टेशन है। वहीं दूसरी रसोई गैस एजेंसी के पास पेट्रोल पम्प है।
आश्चर्य की बात है कि सीकर शहर में पिछले दिनो रसोई गैस के कारण कई हादसे होने के बावजूद जिम्मेदारों का इस ओर ध्यान तक नहीं गया है। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इधर एजेंसी संचालक और प्रशासन सीकर शहर के मास्टर प्लान 2031 के अनुसार इस क्षेत्र को घनी आबादी में नहीं मान रहा है।
पर्याप्त नहीं है सुरक्षा
सीकर शहर में रसोई गैस गोदाम शिफ्टिंग के कई नोटिस देने के बाद भी एजेंसी संचालक व प्रशासन गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। ऐसे में एक मामूली चिंगारी कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकती है। हालांकि गोदाम में अग्नि शमन यंत्र लगाए हुए हैं लेकिन गोदाम में रखे सिलेंडर की संख्या के अनुसार ये पर्याप्त नहीं है।
सीकर के एक लाख लोगों पर संकट
18 हजार सिलेंडर की प्रतिदिन लोडिंग-अनलोडिंग फतेहपुर रोड पर भगवती गैस एजेंसी, विक्रम गैस एजेंसी व देव गैस एजेंसी पर प्रतिदिन औसतन 18 से 20 हजार सिलेंडरों की लोडिंग- अनलोडिंग होती है। इन गोदामों के आस-पास दर्जनों कॉलोनियां हैं जिनकी आबादी एक लाख से अधिक लोगों की है।
यह है सीकर की गैस एजेंसियों का मामला
नगरीय आवास एवं स्वायत्त शासन विभाग ने नवम्बर 2011 में सीकर की घनी आबादी क्षेत्र में स्थित रसोई गैस गोदाम गोदाम को शिफ्ट करने के निर्देश दिए थे। गैस एजेंसियों की हठधर्मिता को लेकर तत्कालीन सीकर जिला कलक्टर ने तीनों रसोई गैस एजेंसी की सप्लाई ही रोक थी। बाद में रामगढ़ शेखावाटी की गैस एजेंसी के जरिए शहर में गैस आपूर्ति करवाई गई। बाद में प्रकरण को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। हालांकि पूर्व में एजेंसी संचालकों ने रीको क्षेत्र में गोदाम शिफ्ट करने के लिए भूमि आंवटित करने की मांग तो रीको ने भूखंड के नहीं होने का हवाला दिया। बाद में शहरी सीमा क्षेत्र में गोदाम के लिए भूखंड लेकर गोदाम भी तैयार किए गए हैं।
गोदाम के लिए जगह फिर भी अनदेखी
रीको क्षेत्र में भूखंड नहीं मिलने पर विक्रम गैस एजेंसी ने कहारों की ढाणी में, देव गैस एजेंसी ने औद्योगिक क्षेत्र में लीज पर व भगवती गैस एजेंसी ने सबलपुरा में भूमि खरीद ली। भूमि के कन्वर्जन और निर्माण कार्य को देखते हुए पेट्रोलियम कम्पनियों के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से आठ से दस माह का समय मांगा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने अंतिम नोटिस जारी कर दिया है।
ज्यादा जानकारी नहीं है
यह मामला मेरे कार्यकाल से पहले का है। मेरे कार्यालय के स्तर पर कोई इस तरह का प्रकरण विचाराधीन नहीं है। प्रकरण की जानकारी लेकर उचित कार्रवाई करवाई जाएगी।
- उम्मेद सिंह पूनिया, जिला रसद अधिकारी, सीकर
Published on:
19 Apr 2018 07:36 pm
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