
LPG cylinder shortage: रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद भी आमजन को समय पर घरेलू गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहे है। कई उपभोक्ता पिछले 10 दिन से परेशान हो रहे हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्राें में गैस सिलेंडर की मारामारी अधिक चल रही है।
मिठाई की दुकानों, चाय की थड़ियों व अन्य गोदामों में धड़ल्ले से घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग किया जा रहा है। होटल, ढाबा और हॉस्टल संचालकों ने अन्य ऑप्शन तलाशने शुरू कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में गैस सप्लाई की परेशानी बढ़ गई है। उपभोक्ता इलेक्ट्रोनिक इंडक्शन, सिगड़ी-कोयला की व्यवस्था करने लगे।
कोचिंग हब सीकर में हर कोचिंग में हजारों विद्यार्थी हॉस्टल्स में रह रहे हैं। वहीं हजारों विद्यार्थी अपने पैरेंट्स के साथ किराए पर मकान व फ्लेट लेकर रह रहे हैं। चूंकि वे दूर दराज के जिलों व राज्यों से हैं, ऐसे में वे पांच किलो के घरेलू, कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में इन सिलेंडरों की मारामारी होने के साथ ही रेट भी अधिक बढ़ गई है। जिससे किराए पर मकान लेकर बच्चों को पढ़ाने वाले माता-पिता भी गैस की किल्लत से परेशान हैं।
ढाबा, थड़ी, चाय वालों ने अब सिगड़ी व चूल्हे का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। हालांकि होटल-ढाबा संचालक भी पहले की तरह तंदूर व चूल्हे पर ही सब्जियां व अन्य चीजें भी बनाना शुरू कर दिया है।
श्रीमाधोपुर कस्बे के कंचनपुरा गांव में भी गैस सिलेंडर नहीं पहुंच रहे हैं। रानोली कस्बे के पास गोरिया गांव में पिछले 4 दिनों से गैस सिलेंडरों की सप्लाई नहीं हो रही है। गांव के लोग गैस एजेंसी वाले को बार-बार फोन कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। गोरिया गांव में पिपराली गैस एजेंसी से सिलेंडर सप्लाई होते हैं, लेकिन 4 दिन सप्लाई पूरी तरह ठप है।
ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू गैस सिलेंडर की किल्लत अब चर्चा का मुख्य केंद्र बन गई है। आम जनता के साथ-साथ दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारी भी काम छोड़कर गैस सिलेंडर लेने के लिए भागदौड़ कर रहे हैं। रानोली कस्बे में गैस की गाड़ियों के पीछे दूर-दूर तक जाना पड़ता है, एजेंसी वाले मनमर्जी कर रहे हैं। इसमें भी समयावधि निश्चित होने के कारण कई बार खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
पटवारी गैस एजेंसी पर 2 मार्च को गैस सिलेंडर की बुकिंग करवाई थी। 10 दिन बाद गुजरने के बावजूद गैस की डिलेवरी नहीं की जा रही है जबकि मौके पर गोदाम में गैस सिलेंडर का काफी स्टाॅक है। उपभोक्ता का कहना है कि एजेंसी वाले फोन तक नहीं उठा रहे हैं। डीएसओ को भी शिकायत की गई है लेकिन फिर भी कोई निदान नहीं हो रहा है।
रसोई गैस की कीमत पहले ही अधिक थी, इसमें 60 रुपए बढ़ाने से रसोई का खर्च बढ़ गया है। उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर की आपूर्ति नहीं की जा रही है। गृहिणियां गैस सिलेंडर को लेकर पैनिक हो रही हैं, ऐसे में एजेंसी व जिला प्रशासन को सिलेंडरों की कालाबाजारी व घरेलू गैस सिलेंडरों क कॉमर्शयिल उपयोग तुरंत प्रभाव रोकना चाहिए।
हॉस्टल संचालकों को कॉमर्शयिल गैस सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए और जितना हो सके, कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की पूर्त करनी चाहिए ताकि एग्जाम के समय में हॉस्टल में रह रहे छात्र-छात्राओं को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। मजबूरी में कुछ हाॅस्टल संचालक चपातियां, सब्जियां चूल्हे व सिगड़ी पर पका रहे हैं।
सीकर में घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडरों की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है। गैस की कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उपभोक्ता अनावश्यक ज्यादा बुकिंग या स्टॉक न करें। 25 दिन बाद ही गैस बुक करवाएं, ताकि सभी उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जा सके। जिले में गैस की कोई कमी नहीं है।
Updated on:
13 Mar 2026 05:20 pm
Published on:
13 Mar 2026 05:19 pm
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