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सीकर। राजस्थान सरकार ने लगभग ढ़ाई साल के इंतजार के बाद नगर निकाय व पंचायत चुनाव से पहले जिला जन अभाव अभियोग व सतर्कता समिति पर मुहर लगा दी है । सीकर जिला समिति में वरिष्ठों को तो जगह मिली है, जबकि सामान्य कार्यकर्ताओं को अब भी इंतजार है। जिला की समिति में दो पूर्व जिलाध्यक्ष व एक पूर्व विधायक का नाम शामिल होने पर सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाएं रही । जिला व उपखंड स्तरीय समितियों में 59 कार्यकर्ताओं को जगह मिली है ।
जिला जन अभाव अभियोग समिति में पूर्व जिलाध्यक्ष इंदिरा चौधरी, मनोज सिंघानिया, पूर्व विधायक केडी बाबर, पूर्णमल मीणा, कैलाश कुमावत, पवन पुजारी, मुश्ताक खान, राजप्रकाश सैनी, सुनीता रणवा, दिनेश जोशी को जगह मिली है । सियासी नियुक्ति में जातिगत समीकरणों को भी साधा गया है, लेकिन राजपूत समाज की नाराजगी भी सामने आई है । लोगों का सवाल है कि इस समिति का गठन यदि दो साल पहले होता तो आमजन को अब तक काफी फायदा मिल चुका होता ।
जिला स्तरीय समिति के साथ सरकार ने सीकर उपखंड स्तरीय समिति का भी गठन किया है । इसमें मंडल अध्यक्षों को भी जगह मिली है । इसमें इन्द्र शर्मा, श्रवण मूण्ड, प्रदीप अग्रवाल, सुभाष दानोदिया, नगेन्द्र मीणा, मुकेश नायक व ओमेन्द्र चारण के नाम शामिल है ।
सीकर जिला जन अभाव अभियोग समिति में राजपूत समाज को भागीदारी नहीं मिलने पर राजपूत सभा व राजपूत समाज ने नाराजगी जताई है । इस मामले में समाज के पदाधिकारियों ने रविवार को यूडीएच मंत्री झाबरसिंह खर्रा को ज्ञापन देकर पीड़ा बताई ।
राजपूत सभा जिलाध्यक्ष रामसिंह पिपराली ने बताया कि जिला जन अभाव अभियोग निराकरण व सतर्कता समिति में 10 सदस्य मनोनित किए गए, इनमें राजपूत समाज का एक भी सदस्य नहीं है।
वहीं उपखंड सीकर, फतेहपुर, नीमकाथाना, दांतारामगढ़, श्रीमाधोपुर, धोद व नेछवा में सात-सात सदस्य मनोनीत किए गए हैं, इसमें भी राजपूत समाज का प्रतिनिधित्व नहीं है। कुल जिला स्तरीय 10 व उपखंड स्तर पर 49 सदस्य, कुल 59 सदस्यों में एक की राजपूत समाज का सदस्य शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि समाज के लोगों के कोर वोटर होने के बाद भी इस तरह की अनदेखी से नाराजगी बढ़ा दी है ।
Updated on:
10 Aug 2026 05:57 pm
Published on:
10 Aug 2026 05:55 pm
