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सीकर सेप्टिक टैंक हादसा: 5 भाइयों में सबसे छोटा था सिकंदर, पत्नी और 3 बच्चों को छोड़ गया; साढ़े 12 घंटे बाद मिला शव

सीकर में सेप्टिक टैंक की खुदाई के दौरान मिट्टी धंसने से एक मजदूर दब गया। पुलिस, सिविल डिफेंस और स्थानीय लोग रेस्क्यू में जुटे हैं। आसपास के हॉस्टल भी एहतियात के तौर पर खाली कराए गए हैं।
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सीकर

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Harshita Saini

Aug 08, 2026

sikar septic tank incident

सीकर के पिपराली रोड पर आदर्श गर्ल्स हॉस्टल में ढहे सेप्टिक टैंक में फंसे सिंकदर को निकालने में जुटी टीम। (Photo-Patrika)

Sikar Septic Tank Accident: सीकर के पिपराली चौराहे के पास शनिवार दोपहर हॉस्टल के लिए सेप्टिक टैंक की खुदाई के दौरान मिट्टी ढहने से एक श्रमिक करीब 23 फीट गहरी कुई में दब गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। श्रमिक को निकालने के लिए एसडीआरएफ, पुलिस, सिविल डिफेंस, नगर परिषद और साथी श्रमिकों ने घंटों तक मशक्कत की। साढ़े 12 घंटे बाद देर रात 2.00 बजे बचाव दल ने श्रमिक को गड्ढे से बाहर निकाल लिया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। मिट्टी लगातार धंसने और बचाव के लिए लगाए गए सीमेंट के फर्में डगमगाने से रेस्क्यू ऑपरेशन में परेशानी आई। मौके पर सीकर एसडीएम सुशील कुमार, उद्योग नगर थानाधिकारी राजेश कुमार सहित नगर परिषद का अमला मौजूद रहा। विधायक राजेंद्र पारीक भी मौके पर पहुंचे। श्रमिक को सुरक्षित निकालने के लिए देररात तक प्रयास किए जा रहे थे। हादसे की सूचना पर मौके पर सैकड़ों लोग भी एकत्रित हो गए। पुलिस के अनुसार हादसा दोपहर करीब डेढ़ बजे हुआ।

पिपराली चौराहे से पहले एक गली में आदर्श गर्ल्स हॉस्टल के लिए सेप्टिक टैंक (कुई) की खुदाई चल रही थी। श्रमिक करीब 22 से 23 फीट तक खुदाई कर चुके थे। इसी दौरान पास में बने पुराने सीवरेज टैंक की गीली मिट्टी ढह गई और वहां काम कर रहा सिकंदर अली (35) पुत्र नवाब अली, निवासी काजियों की गली, मोहल्ला इस्लामिया स्कूल, वार्ड 10, मिट्टी में दब गया। साथी श्रमिकों अब्दुल वासिद, मोहम्मद रिजवान और मोहम्मद नाजिद ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। जेसीबी की मदद से मिट्टी हटाने का प्रयास किया गया, लेकिन श्रमिक तक पहुंच नहीं बन पाई। इसके बाद सिविल डिफेंस की टीम मौके पर पहुंची। सीमेंट के फर्में लगाकर नीचे तक पहुंचने का रास्ता बनाया गया और लगातार मिट्टी निकाली गई।

मिट्टी धंसने से मुश्किल

शाम करीब 4.30 बजे बचाव कार्य के दौरान हॉस्टल के आगे की मिट्टी भी धंसने लगी। सीमेंट के फर्में भी नीचे से डगमगाने लगे। सुरक्षा को देखते हुए हॉस्टल के आगे के हिस्से में रह रही छात्राओं को हॉस्टल से हटाया गया। परिषद से मिट्टी के कट्टे और अन्य संसाधन मंगवाकर दोबारा बचाव कार्य शुरू किया गया।

पांच भाइयों में सबसे छोटा सिकंदर, 3 बच्चे

23 फीट गहरी कुई में दबे श्रमिक सिकंदर अली पांच भाइयों में सबसे छोटे हैं और उनके तीन बच्चे हैं। हादसे की सूचना मिलते ही उनके चारों बड़े भाई, भतीजे और मोहल्ले के सैकड़ों लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। देर रात तक सभी की नजरें रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी रहीं। सिकंदर के मोहल्ले में भी लोग उनके सुरक्षित बाहर निकलने का इंतजार करते रहे। मौके पर चिकित्सा टीम, 108 एंबुलेंस, नगर परिषद, जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारी तैनात रहे।

एसडीआरएफ ने संभाला रेस्क्यू

सिविल डिफेंस के चीफ वार्डन मदन सिंह कुड़ी के नेतृत्व में अनुदेशक श्रवण बुरड़क सहित 30 सदस्यों की टीम ने दोपहर 2.30 बजे रेस्क्यू शुरू किया। जयपुर से एसडीआरएफ की टीम शाम 5.30 बजे पहुंची। टीम ने हाइड्रा और पोकलेन मशीनों की मदद से करीब चार फीट चौड़े और 17 फीट लंबे लोहे के पाइप घटनास्थल के पास डालने शुरू किए। पाइप के भीतर एसडीआरएफ के भागीरथमल सहित दो जवान और सिविल डिफेंस के विनोद गोदारा खुदाई कर मिट्टी बाहर निकालते रहे। इसके बाद पाइप को धीरे-धीरे नीचे उतारा गया। मौके पर सीकर विधायक राजेंद्र पारीक, पूर्व उपसभापति जीवण खान, उद्योग नगर थानाधिकारी राजेश कुमार सहित भारी पुलिस जाब्ता तैनात रहा।

नियमों के बिना बन रहे बहुमंजिला हॉस्टल

पिपराली-नवलगढ़ रोड की छोटी गलियों में नियम-कायदों को ताक पर रखकर बहुमंजिला हॉस्टल बनाए जाने का मुद्दा भी हादसे के बाद सामने आया। लोगों का कहना है कि संकरी गलियों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी हो रही है।