
रविन्द्र सिंह राठौड़
सीकर.
अभावों को मात देकर किसान की लाडो ने जब लक्ष्य पर निशाना साधा तो बड़े-बड़े निशानेबाज अचंभे में पड़ गए। मात्र एक वर्ष के प्रशिक्षण में लाडो का सटीक निशानेबाजी पर अन्तरराष्ट्रीय शूटिंग चैम्पियनशिप की ट्रायल में चयन हुआ है। हम बात कर रहे है लक्ष्मणगढ़ के खूड़ी छोटी गांव की नीलम राठौड़ की। किसान पिता की बीमारी से आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार के सामने बेटी के सपने को पूरा करना मुश्किल भरा काम था, लेकिन लगन व मेहनत के आगे सब रास्ते बनते गए। नीलम ने 10 मीटर पिस्टल चैंपियनशिप में 400 में से 369 अंक प्राप्त कि ए। जूनियर व सीनियर वर्ग में क्वालिफाई करने वाली शेखावाटी की एक मात्र बेटी हैं। ट्रायल में क्वालीफाइड होने के बाद नीलम एशियाड गेम्स में भाग ले सकती हैं।
निशाना देख प्रशिक्षक भी अचंभित
नीलम राठौड़ शूटिंग से पूरी तरह अंजान थी। परिवार के आर्थिक तंगी में रहने के कारण पढ़ाई भी पूरी नहीं हो पा रही थी। इसी दौरान नीलम को उसके ममेरे भाई ने निशानेबाजी के बारे में बताया। उसी दिन से नीलम ने निशानेबाजी में कुछ अलग करने की मन में ठान ली। नीलम एक वर्ष पहले सीकर के शूटिंग रेंज में पहुंची तो फीस सुनकर उसके होश उड़ गए। शूटिंग रेंज में जब पहली बार बिना प्रशिक्षण के नीलम ने सटीक निशाना लगाया तो प्रशिक्षक भी अंचभित हो गए। शूटिंग रेंज के प्रशिक्षक ओमप्रकाश चौधरी ने बताया कि नीलम की प्रतिभा देखकर उसे फीस में 50 प्रतिशत की छूट दी गई।
बहन ने की मदद
नीलम की शूटिंग में लगन देखकर सीकर के नाथावतपुरा स्थित मीरा कन्या विद्यालय की प्राचार्या मंजू ने मदद का बीड़ा उठाया। कुछ समय प्रशिक्षण के लिए फीस मंजू ने चुकाई।
हर दिन आती है सीकर
नीलम ने बताया कि पढ़ाई के अलावा स्पोट्र्स में कभी ज्यादा रूचि नहीं रही। 11 वीं कक्षा में एक बार जिला स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भाग लिया। तीन किलोमीटर प्रतियोगिता में चौथे स्थान पर तथा पांच किलोमीटर की पैदल दौड़ में पांचवें स्थान पर रही। 12 वीं कक्षा में 63 प्रतिशत व आट्र्स से कॉलेज के फाइनल में 69 प्रतिशत अंकों से पास हुई। नीलम प्रशिक्षण के लिए हर दिन खूड़ी गांव से सीकर आती है।
आगे बढऩे की ललक हर समय कचौटती थी
नीलम के पिता रामपालसिंह राठौड़ पिछले पांच साल से बीमारी से ग्रस्त होने के कारण बिस्तर पर है। परिवार में दो बहनें एक छोटा भाई हैं। पिता की बीमारी के बाद से परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है। इसके चलते परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है। सरकारी स्कूल से 12 वीं पास करने के बाद फिलहाल नीलम लोहिया कॉलेज चूरू से प्राइवेट एमए प्रीवियस की पढ़ाई कर रही है।
Updated on:
05 Jan 2018 01:10 pm
Published on:
05 Jan 2018 12:45 pm
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