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Sikar Emotional Story: भाई की मौत का दर्द नहीं सहन कर पाई बहन, भाई के चौखट पर ही त्याग दिए प्राण

राजस्थान के सीकर जिले से भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है, जहां भाई का शव देखते ही बहन अचेत हो गई और कुछ ही देर में प्राण त्याग दिए। भाई की मौत की खबर सुनने के बाद प्रभाती देवी ससुराल से मायके पहुंची थी। भाई के चौखट पर ही उनकी भी मौत हो गई।
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सीकर

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Kamal Mishra

Aug 13, 2026

sikar news

Sikar: मृतका प्रभाती देवी (फाइल फोटो-पत्रिका)

सीकर। भाई-बहन का रिश्ता जीवनभर एक-दूसरे के सुख-दुख का साथी रहता है। ऐसा ही अटूट रिश्ता नीमकाथाना क्षेत्र के गांव दरीबा में देखने को मिला। तीन भाइयों की इकलौती बहन 65 वर्षीय प्रभाती देवी अपने तीसरे और आखिरी भाई भगवाना राम सैनी (70) के निधन का सदमा सहन नहीं कर पाई। भाई का शव देखते ही वह बिलख पड़ी और कुछ ही देर बाद उनकी भी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें संभाल पाते, इससे पहले ही बहन ने भी भाई के घर पर ही प्राण त्याग दिए।

जानकारी के अनुसार खादरा निवासी प्रभाती देवी पत्नी मंगलचंद सैनी बुधवार सुबह करीब 11 बजे अपने भाई भगवाना राम सैनी निवासी दरीबा के अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंची थी। भाई का शव देखते ही वह जोर-जोर से रोने लगी। इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे अचेत हो गई। परिजन उन्हें तत्काल खादरा ले गए, लेकिन उनकी मौत हो चुकी थी।

ससुराल में हुआ अंतिम संस्कार

बुधवार दोपहर करीब 12 बजे दरीबा में भाई भगवाना राम का अंतिम संस्कार किया गया। वहीं गुरुवार सुबह 11 बजे खादरा में बहन प्रभाती देवी का अंतिम संस्कार किया गया।

चार साल पहले दो भाइयों को खो चुकी थी बहन

ग्रामीणों के अनुसार मृतका प्रभाती देवी तीन भाइयों की इकलौती बहन थी। करीब चार वर्ष पहले उन्होंने अपने दो भाइयों को खो दिया था। अब तीसरे भाई के निधन से वह पूरी तरह टूट गई। रक्षाबंधन के त्योहार से महज 15 दिन पहले हुई इस घटना ने ग्रामीणों को भी भावुक कर दिया।

सेवा भाव के लिए जानी जाती थी प्रभाती देवी

ग्रामीणों ने बताया कि प्रभाती देवी धार्मिक प्रवृत्ति की थी और हमेशा लोगों के सुख-दुख में साथ खड़ी रहती थी। पक्षियों के लिए दाना डालना तथा गर्मी के दिनों में जंगल में पानी की व्यवस्था करवाना उनकी नियमित सेवा थी। उनके पांच बेटे हैं। परिवार के अनुसार चार बेटे और तीन बहुएं सरकारी सेवा में कार्यरत हैं। प्रभाती देवी के निधन से परिवार और गांव में शोक की लहर है।

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