
सीकर में हर 100 में से 4 लड़कियां 19 की उम्र से पहले हो रहीं प्रेग्नेंट (फोटो-एआई)
सीकर: भले ही सीकर जिले में किशोर स्वास्थ्य दिवस के मौके पर जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में किशोरियों को बिना झिझक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचाने के लिए किशोर-अनुकूल माहौल नहीं मिल रहा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 की रिपोर्ट के अनुसार, किशोरावस्था शरीर और दिमाग के विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था है, लेकिन इसी उम्र में पोषण की कमी, एनीमिया, मानसिक तनाव, मोटापा, नशे की शुरुआत, यौन एवं प्रजनन संबंधी संक्रमण और कम उम्र में गर्भधारण जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है।
सर्वे-5 आधारित आंकड़ों के अनुसार, किशोरावस्था में पर्याप्त प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व नहीं मिलने पर शारीरिक विकास प्रभावित हो रहा है। जंक फूड, कम शारीरिक गतिविधि और स्क्रीन टाइम बढ़ने से किशोरों में अधिक वजन और मोटापे का खतरा भी बढ़ रहा है।
राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम में पोषण संबंधी विकारों में कुपोषण, एनीमिया, ओवरवेट, पढ़ाई, बढ़ती प्रतिस्पर्धा, पारिवारिक दबाव, सोशल मीडिया और भविष्य को लेकर चिंता किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण माना गया है।
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, 15 से 19 साल के आयु वर्ग में 24.2 प्रतिशत लड़कियों का विवाह 18 वर्ष से पहले हो चुका था। प्रदेश में 15 से 19 वर्ष की किशोरियों के गर्भवती होने के आंकड़ों में कई जिलों के बीच बड़ा अंतर है। बांसवाड़ा में यह आंकड़ा करीब 12 प्रतिशत, करौली में 10.8 प्रतिशत और सवाईमाधोपुर में 9.6 प्रतिशत था। वहीं, सीकर का आंकड़ा 3.7 प्रतिशत है।
सीकर में 18 वर्ष से पहले विवाह का प्रतिशत 24.2 दर्ज हुआ है। इसकी तुलना में करौली में यह करीब 49.8 प्रतिशत, सवाईमाधोपुर में 47.7 और टोंक में 47.3 प्रतिशत था। हालांकि, सीकर इन जिलों की तुलना में बेहतर स्थिति में है। लेकिन हर चार में से एक किशोरी का बाल विवाह होना गंभीर विषय है।
किशोरावस्था में तंबाकू, शराब और अन्य नशीले पदार्थों की शुरुआत आगे चलकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण है। विशेषज्ञों के अनुसार आंकड़े बताते हैं कि किशोर स्वास्थ्य को केवल बीमारी और इलाज के नजरिए से नहीं, पोषण, शिक्षा, बाल विवाह और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है।
सर्वे-4 की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में 15-19 वर्ष की 49.1 प्रतिशत किशोरियां और 22.1 प्रतिशत किशोर एनीमिया से प्रभावित थे। किशोरियों में मासिक धर्म के दौरान रक्त की कमी, बढ़ती उम्र में आयरन की जरूरत और भोजन में पोषक तत्वों की कमी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। वहीं, सर्वे-5 के राष्ट्रीय विश्लेषण में 15-19 वर्ष के किशोरों में एनीमिया की दर 59.2 फीसदी तक पहुंच गया है।
सर्वे के अनुसार अनियमित जीवनशैली के कारण कारण किशोर व किशोर में कई असाध्य बीमारियां बढ़ी है। परिजन किशोरावस्था को देखते हुए बच्चे का अभिभावक बनने की बजाए दोस्त बनकर नियमित काउंसिलिंग करें। इस उम्र में आने वाले शारीरिक और मानसिक बदलाव के बारे में स्पष्ट और जानकारी दें। किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत गुरुवार को आउटरीच शिविर लगाए जाएंगे।
-डॉ. विशाल सिंह, आरसीएचओ सीकर
Updated on:
13 Aug 2026 11:06 am
Published on:
13 Aug 2026 11:06 am
बड़ी खबरें
View Allसीकर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
