
जन्माष्टमी विशेष: राजस्थान में यहां दो बार जन्म लेते हैं कान्हा, जानिए 600 वर्ष पुराने इस मंदिर का रोचक इतिहास
जनार्धन शर्मा, खंडेला।
Krishna Birthday Twice in Banke Bihari ji Temple Khandela : जन्माष्टमी ( Janmashtami 2019 ) पर आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे है, जहां भगवान श्रीकृष्ण का जन्म एक बार नहीं, बल्कि दो बार होता है। भक्तों का मानना है कि यहां प्रसाद के रूप में मिले चरणामृत के सेवन से कई रोगों का विनाश भी होता है। यह मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के खंडेला में स्थित है। क्षेत्र में बह्ममपुरी मौहल्ले में स्थित पुराने बिहारी जी के मंदिर का निर्माण 600 वर्ष पूर्व हुआ था।
मंदिर में स्थापित भगवान की प्रमिता को वृंदावन से सिर पर रखकर लाया गया था। बताते हैं कि खंडेला के शासक परशुराम पुरोहित तत्कालीन समय के राजगुरु की पुत्री करमेती बाई कृष्ण भक्ति के चलते वृंदावन चली गई थी। राजा ने तलाश के लिए सैनिक भेजे, तब करमेती बाई एक मरे हुए ऊंट की खाल में छिप गई। राजा को पता चला कि करमेती बाई वृंदावन में है। तब खुद राजा वृंदावन जाकर कमरेती बाई को लौटने के लिए कहा तो उन्होंने इनकार कर दिया।
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करमेती बाई ने बिहारी महाराज व राधा की मूर्ति दी और खंडेला लेकर चलने को कहा। दोनों मूर्तियां बहुत भारी थी। तब प्रतिमा को सिर पर ऊंचकर वृंदावन से खंडेला लेकर आए थे। मंदिर के पुजारी ने बताया कि जन्माष्टमी के दिन बिहारी जी महाराज का जन्म दो बार मनाये जाने की परम्परा सदियों से चली आ रही है। बिहारी जी का जन्म दोपहर में 2 बजे व रात 12 बजे मनाया जाता है।
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भगवान को 108 प्रकार की औषधियों व चारोड़ा धाम से लाई गई चिकनी मिट्टी से स्नान करवाया जाता है। औषधियों व चिकनी मिट्टी के स्नान के बाद वहां उपस्थित भक्तों को चरणामृत वितरित किया जाता है और मिट्टी लोग अपने घर ले जाकर पूजा स्थल पर रख देते है। ऐसा कहा जाता है कि बिहारी जी के स्नान का चरणामृत गृहण करने से अनेक प्रकार की बीमारियों का नाश होता है।
Published on:
24 Aug 2019 01:09 pm
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