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Tarun Sagar महाराज ने राजस्थान के इस श्मशान घाट में बनाया था 50वां जन्मदिन, ये थी वजह

तरुण सागर का सीकर से था गहरा रिश्ता, सबसे ऊंची पुस्तक का सबसे छोटी महिला ने किया था लोकार्पण,51 फीट ऊंची पुस्तक, 31 सौ किलो वजन, 150 किलो लगी थी स्याही

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Tarun Sagar

Tarun in sikar

सीकर. राष्ट्रीय संत मुनि तरुण सागर महाराज का शनिवार को देवलोकगमन हो गया। उनका सीकर से विशेष लगाव रहा। उन्होंने पिछला चातुर्मास सीकर में किया था। 50वां जन्मदिन भी शेखावाटी धरा पर मनाया था। 23 जुलाई से छह अगस्त 2017 तक यहां उनके कड़वे प्रवचनों का कार्यक्रम हुआ था।

खास बात यह है कि उनके प्रवचनों में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के लिए पहली बार रामलीला मैदान में विशेष व्यवस्था की गई थी। इंदौर का एसी पांडाल लगाया गया था। इस वातानुकूलित पांडाल को सजाने के लिए कारीगर भी विशेष तौर पर इंदौर से बुलाए गए थे। महाराज का सीकर में चातुर्मास के लिए मंगल प्रवेश दो जुलाई को हुआ था।

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51 ऊंची पुस्तक का विमोचन

6 अगस्त 2017 को सीकर में तरुण सागर के कड़वे प्रवचन भाग संख्या नौ की 51 फीट ऊंची पुस्तक का विमोचन किया गया था। जीवन जीने की कला सिखाने वाली इस पुस्तक का वजन 31 क्विंटल था। इससे विश्व सबसे ऊंची पुस्तक माना जाता है। पुस्तक का विमोचन सीकर के रामलीला मैदान में दुनिया की सबसे छोटी (24 इंच)महिला ज्योति आमगे ने किया था।

150 किलो से अधिक स्याही से छपी इस पुस्तक को लोहे के एंगल पर नासिक की विशेष टीम ने तैयार किया। सीकर में तरुण सागर की पुस्तक के विमोचन पर इसके दस पेज खोले गए थे, जो शीशे की तरह खुलते रहे। हर एक पन्ने पर कड़वे प्रवचनों की शब्दावली को उकेरा हुआ था। भव्य नजारा देखकर मौके पर जमा लोगों ने भी आयोजन को जमकर सराहा। सीकर के बाद 20 अगस्त 2017 को इस पुस्तक का देशभर में विमोचन किया गया था।

इससे पहले जैन मुनि की पुस्तक कड़वे प्रवचन भाग संख्या सात भी लिम्का बुक में दर्ज है। कड़वे प्रवचनों की पुस्तक भाग संख्या आठ भी अब-तक दुनिया की सबसे बड़ी पुस्तक होने के कारण गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज है। पुस्तक का विमोचन करने वाली ज्योति आमगे का वजन साढ़े पांच किलो है। नागपुर की रहने वाली 24 इंच की ज्योति एक दिन में एक चपाती व थोड़ा सा चावल खाती हैं।

इससे पहले उनके मंगल प्रवेश पर दो जुलाई को मंडी से विशाल जुलूस निकला था। जुलूस देवीपुरा, स्टेशन रोड, जाटिया बाजार होते हुए जैन भवन पहुंचा। इस दौरान शहर में 200 फीट लंबा विशेष रैम्प तैयार किया गया था। 108 जोड़ों ने महाराज का चरण प्रक्षालन किया था।

9 जुलाई को रामलीला मैदान में गुरु पूर्णिमा महोत्सव मनाया गया, इसमें देशभर के शिष्यों ने शिरकत की। 20 जुलाई को बजाज रोड स्थित जैन भवन में दीक्षा दिवस मनाया गया था। 23 जुलाई से 6 अगस्त तक रामलीला मैदान में प्रवचन हुए थे। राष्ट्रीय संत तरुण सागर महाराज सीकर विहार के लिए 28 मई को दिल्ली से रवाना हुए थे। तीन सौ किलोमीटर की यात्रा पूरी कर वे सीकर पहुंचे थे।

शेखावाटी में मनाया 50वां जन्मदिन
26 जून 2017 को उदयपुरवाटी में मुनि ने 50वां जन्मदिन मोक्षधाम अर्थात शमशान घाट पर मनाया था। सीकर के चातुर्मास में कई विधायक व सांसदों के साथ राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी दर्शन के लिए आई थी।

सीकर में आज विनयांजलि सभा

जैन धर्म को जन-जन तक पहुंचाने वाले क्रांतिकारी राष्ट्र संत मुनि तरुणसागर महाराज को श्रद्धांजलि देने के लिए दो सितम्बर को सुबह आठ बजे पाŸवनाथ भवन,दंग की नसियां सीकर में मुनि विश्रान्त सागर महाराज के सानिध्य में सर्व समाज की विनयांजलि सभा होगी ।

तरुण सागर के कार्य आने वाली पीढ़ी नहीं भुला सकेगी
सीकर. दंग की नसिया में चातुर्मास कर रहे प्रवचन केसरी मुनि विश्रान्त सागर महाराज ने शनिवार को धर्म सभा में कहा कि जैन दर्शन में जन्म महत्व नहीं रखता, मृत्यु महत्वपूर्ण होती है। जैन दर्शन में मृत्यु को महोत्सव बनाना ही जीवन जीने की कला है। आज महोत्सव मनाया जा रहा है। तरुण सागर ने जो कार्य किए हैं उनको आने वाली पीढ़ी कभी नहीं भुला पाएगी।

लोग आपके निंदा करें तो करने देना। आप सही रास्ते पर चलते रहो, जब एक दिन दुनिया से आप चले जाओगे तब लोग आपको याद करेंगे। अगर अपना नाम छोडऩा है तो काम बहुत अच्छा करना पड़ेगा जैसे तरुण सागर ने किया है।