
सीकर. ड्रेसडन जर्मनी में आयोजित 25वें वर्ल्ड ट्रांसप्लांट एथलेटिक्स गेम्स में देश और प्रदेश के 57 खिलाड़ियों ने 16 गोल्ड, 22 सिल्वर और 23 ब्रॉन्ज कुल 63 मेडल जीते हैं। ट्रांसप्लांट खिलाड़ियों ने विश्वभर में नया कीर्तिमान बनाते हुए भारत का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन किया है। ऑर्गन ट्रांसप्लांट खिलाड़ियों की तैयारी, खेल सामग्री, फ्लाइट, कोच, रहने, खाने सहित किसी भी प्रकार का खर्चा तक भारत सरकार या राज्य सरकार की ओर से वहन नहीं किया जा रहा है। जबकि ओलिंपिक, पैरालिम्पिक, कॉमनवेल्थ, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों के खिलाड़ियों के समस्त खर्च, खेल उपकरण, कोच नकद राशि, सरकारी नौकरी व प्लॉट, मकान आदि तक दिए जाते हैं। जबकि बड़े संघर्षों व आर्थिक समस्या से जूझते हुए ऑर्गन ट्रांसप्लांट खिलाड़ी देश के लिए मेडल ला रहे हैं।
भारत के ऑर्गन ट्रांसप्लांट खिलाड़ियों को ऑर्गन इंडिया नामक संस्था वर्ल्ड ट्रांसप्लांट खिलाड़ियों का चयन करने के साथ ही निजी कंपनियों, संस्थाओं व सीएसआर फंड से दान लेकर खिलाड़ियें का आंशिक खर्चा उठा रही है। ट्रेनिंग, विदेश आने-जाने सहित अन्य खर्चा खिलाड़ी अपने स्तर पर उठाते हैं। जबकि थाइलैंड और हॉन्गकॉन्ग देश की सरकारें ऑर्गन ट्रांसप्लांट खेलों को सपोर्ट करती है, खिलाड़ियों को ट्रेनिंग खर्चा, खेल किट व सामग्री, आने-जाने व ठहरने का खर्चा, कोच का खर्चा सहित समस्त खर्च वहन करते हैं। जबकि राष्ट्रीय स्तर पर मेडल लाने वाले खिलाड़ियों को राजस्थान, हरियाणा, पंजाब सहित कई राज्यों में खेल कोटे से ट्रायल के आधार पर सरकारी नौकरी दे रही है।
25वें वर्ल्ड ट्रांसप्लांट एथलेटिक्स गेम्स-2025 में विश्व के करीब 1600 खिलाड़ियों ने भाग लिया था। इनमें भारत से 57, राजस्थान से नौ और सीकर से एक, झुंझुनूं से दो, राजधानी जयपुर से तीन और जोधपुर जिले से से एक खिलाड़ी ने हिस्सा लिया था। राजस्थान के नौ खिलाड़ियों ने 12 पदक जीते हैं। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी के सहयोग से हर दो वर्ष में वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स फैडरेशन की ओर से इन खेलों का आयोजन करवाया जाता है।
झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ कस्के बे समीप जाखल गांव निवासी भवानीसिंह शेखावत ने 25वें वर्ल्ड ट्रांसप्लांट एथलेटिक्स गेम्स में दो पदक जीते हैं। अब तक वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित सात एथलेटिक्स में 18 पदक जीत चुके हैं। भारत के सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय ऑर्गन ट्रांसप्लांट खिलाड़ी का तमगा भी भवानी सिंह शेखावत के नाम ही है। पैर में इंफेंक्शन के चलते उन्होंने दवाई ली थी, घाव सूखने की एंटीबायोटिक दवाइयों के साइड इफेक्ट से दोनों किडनियां खराब हो गई थी। भवानी सिंह को उनके पिता वेटरनरी कंपाउंडर घनश्यामसिंह शेखावत ने 21 साल पहले 2004 में किडनी डोनेट की थी। भवानीसिंह का भारतीय रेलवे में नर्सिंग ऑफिसर, एम्स में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर भी चयन हो गया था लेकिन बीमारी के चलते पिता ने बाहर नहीं जाने दिया।
सीकर के खूड़ कस्बे के पास कंवरपुरा गांव निवासी रामदेव सिंह मील ने 25वें वर्ल्ड ट्रांसप्लांट एथलेटिक्स गेम्स में एक गोल्ड मेडल सहित कुल 4 पदक अर्जित किए हैं। 37 वर्षीय रामदेव बिजली निगम के सालासर एईएन कार्यालय में तकनीशियन फर्स्ट के पद पर कार्यरत है। इन्होंने 30 से 39 आयुवर्ग में भाला फेंक (जैवलिन) ट्रैक एंड फील्ड इवेंट में स्वर्ण पदक, लंबीकूद में रजत पदक और बॉल थ्रो व डिस्कस में कांस्य पदक जीता है। वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स में 1600 खिलाड़ियों ने भाग लिया। उन्हें 2012 में अपनी मां से जीवनरक्षक किडनी प्रत्यारोपण मिला था। उस समय गंभीर पेट की समस्या के कारण उनके गुर्दे फेल हो गए थे। उनका ठीक होने का सफर बेहद कठिन था और पूरा एक साल लगा। वहीं झुंझुनूं जिले के महला की ढाणी निवासी अंकित कुमार ने तीन मेडल जीते हैं। इसके साथ ही जयपुर के अमित शर्मा, हितेश शर्मा व हर्षवर्धन सिंह के एक-एक मेडल जीते हैं।
ऑर्गन ट्रांसप्लांट खिलाड़ी भवानीसिंह शेखावत व रामदेव मील ने केंद्र सरकार से मांग की है कि केंद्र सरकार व राजस्थान सरकार खिलाड़ियों को समस्त खेल सुविधाएं व काेचिंग, रहना आदि निशुल्क दें। वहीं खेलो इंडिया में ट्रांसप्लांट गेम्स की कैटेगिरी को भी शामिल करने की मांग की है। इस बाबत सभी ऑर्गन ट्रांसप्लांट खिलाड़ियों ने उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, उपमुख्मंत्री प्रेमचंद बैरवा को इस मांग को लेकर ज्ञापन दिया है।
Published on:
19 Sept 2025 01:53 pm
