
इसलिए न्यायालय ने उठाए पुलिस जांच पर सवाल जाने क्या था मामला
फतेहपुर.
अक्सर जनता द्वारा तो पुलिस पर जांच में निष्पक्षता नहीं बरतने के आरोप कई बार देखने को मिलते है लेकिन इस बार पुलिस की साख पर न्यायालय ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोतवाली थाने के एक मामले में पुलिस ने अनुसंधान कर एफआर लगा दी। उसी फाइल को न्यायलय ने दुबारा जांच के लिए भेजते हुए लिखा कि पुलिस ने मामले में निष्पक्षता नहीं बरती है। प्रकरण में पुलिस ने जल्दबाजी करते हुए राजस्व अधिकारियों की रिपोर्ट आने से पहले ही एफआर लगा देना सामने आया। ऐसे में पुलिस की जांच पर सवालिया निशान लग गया है।
जानकारी के अनुसार कस्बे के वार्ड न 25 निवासी महेश वर्मा ने 6 मई 2017 को दो जांटी मंदिर के प्रबंधक प्रभुदयाल शर्मा पुत्र प्रहलादराय शर्मा व उसके पुत्र दिनेश पुत्र प्रभुदयाल शर्मा के खिलाफ प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कररया था। इस प्रकरण में शुरूआती आज कोतवाल फतेहपुर ने की थी। इसके बाद कई जांच अधिकारियों ने मामले की जांच की। इनमें से कुछ ने अपराध प्रमाणित माना व कुछ जांच अधिकारियों ने अपराध को प्रमाणित नहीं माना। डीवाईएसपी गोवर्धनलाल ने अनुसंधान के बाद 14 नवंबर 2018 को एफआर लगा दी। इसके बाद परिवादी महेश कुमार ने एसीजेएम कोर्ट में पुन: जांच के लिए परिवाद दायर किया।
इस पर सुनवाई करते हुए मजिस्ट्रेट ने पुलिस को दुबारा जांच कर दो माह में रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किए है। आदेश में मजिस्टे्रट ने लिखा है कि पुलिस के द्वारा की गई जांच से प्रतीत होता है कि अनुसंधान में निष्पक्षता नहीं बरती गई है।
ऐसे में निष्पक्ष अनुसंधान किया जाना न्योयचित व युक्ति संगत है। एसीजेएम ने एसपी को आदेशित करते हुए सीओ रैंक के अधिकारी से पुन: निष्पक्ष जांच करने को लिखा है।
इसलिए पुलिस जांच पर सवालिया निशान
उपरोक्त प्रकरण में एसीजेएम ने नौ बिंदूओं पर पुन: जांच के निर्देश दिए है। मामले में एसडीएम कार्यालय की ओर से राजस्व अधिकारियों की एक टीम गठित कर रिपोर्ट मांगी गई थी। रिपोर्ट आने से पहले ही पुलिस ने मामले पर एफआर लगा दी। इसके अलावा पुलिस ने द्वारा राजस्व रिकार्ड व राजस्व अधिकारियों की रिपोर्ट को नकार दिया, जबकि राजस्व अधिकारियों की रिपोर्ट भी पत्रावली पर नहीं है।
ना ही कोई ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत किए जिससे राजस्व रिकार्ड गलत साबित होता हो। इसके अलावा अनुसंधान के न्यायलय द्वारा तलब रिपोर्ट में तत्कालीन जांच अधिकारी ने अपराध प्रमाणित होना बताया था, लेकिन उसके बाद भी एफआर लगा दी गई।
31 बिंदुओं के आधार पर लगाई एफआरपूरे प्रकरण में पुलिस के कई अधिकारियों ने जांच की। इसके बाद आईजी के पास भी फाइल गई। जांच के बाद पुलिस ने 31 बिंदू लिखते हुए मामले पर एफआर लगा दी। पुलिस ने एफआर में लिखा कि प्रभुदयाल एक प्रतिष्ठित एवं वृद्ध व्यक्ति है। उसने दो जांटी बालाजी धाम मंदिर का भी निर्माण करवा रखा है। इस तरह की धोखाधड़ी नहीं कर सकता है।
Published on:
20 Jan 2019 05:33 pm
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