17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

गजबः इस गांव में नहीं है एक भी मुस्लिम परिवार, हिंदू करते हैं पीर बाबा की पूजा

थोरासी खरसाडू गांव के दक्षिण के जोहड़े में स्थित पीर बाबा का धाम हिंदू मुस्लिम सौहार्द व जन आस्था का प्रतीक है।

2 min read
Google source verification

सीकर

image

Rakesh Mishra

Sep 26, 2023

peer_baba.jpg

कोलीड़ा। थोरासी खरसाडू गांव के दक्षिण के जोहड़े में स्थित पीर बाबा का धाम हिंदू मुस्लिम सौहार्द व जन आस्था का प्रतीक है। यहां पीर बाबा धाम में पीर बाबा की मजार है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस संबंध में जनश्रुतियां प्रचलित कि पीरबाबा एक घुड़सवार थे। जिन्हें यहां सुपुर्दे खाक किया गया, फिर उनकी मजार बनाई गई। गांव के उम्रदराज लोगों का कहना है कि उनके बुजुर्ग भी पीर बाबा के बारे में बातें करते थे।

यह भी पढ़ें- Monsoon Update: मारवाड़ में मानसून की विदाई शुरू, जैसलमेर जिले से पूरा हटा

स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले पीर बाबा की मजार पर एक पत्थर लगा हुआ था। बाद में भक्तों ने बाबा की मजार पर कई निर्माण कार्य करवाए , जो आज भी अनवरत रूप से जारी हैं। अब पीरबाबा का भव्य धाम आकार ले चुका है। पीरबाबा के दर पर हर वर्ष भाद्रपद की द्वादशी से तीन दिवसीय मेले की शुरुआत होती है। इस दौरान बड़े झूले लगते हैं साथ ही फुटकर बाजार सजता है। इस दौरान बड़ी संख्या हिंदू व मुस्लिम धर्म के श्रद्धालु बाबा के दर पर शीश झुकाकर मनौतियां मनाते हैं।

यह भी पढ़ें- सनसनीखेज खुलासाः जेठ पर कैंपर चढ़ाने की प्लानिंग थी, जेठानी पर चढ़ गई

पीर बाबा की मजार पर हिंदू करते हैं पूजा अर्चना
थोरासी गांव की पूरी आबादी हिंदू है। खास बात यह है कि गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं है। यहां के हिंदू धर्म के लोग ही पीर बाबा धाम की सम्पूर्ण देखरेख और बाबा की मजार पर पूजा अर्चना करते हैं। बाबा की मजार पर अखंड ज्योत दिनरात प्रज्वलित होती रहती है। यहां हर वर्ग और जाति धर्म के लोग आते हैं और बाबा की मजार पर शीश झुकाते हैं। श्रद्धालु बाबा की मजार की परिक्रमा भी करते हैं।

पीर बाबा के चढ़ावे को खेलों में लगाया खेल गांव बना थोरासी
पीर बाबा के दरबार में लोग मनौतियां मनाते है और श्रद्धाभाव से दान-दक्षिणा व चढ़ावा अर्पित करते हैं। पीर बाबा धाम पर भेंट स्वरूप जुटने वाली धन राशि व चढ़ावे की राशि खेल विकास एवं खेल सुविधाओं के विस्तार में भी खर्च किया जाता है। जिसकी वजह से थोरासी में हर तरह कि खेल सुविधाएं मौजूद हैं। यहां फुटबॉल का बड़ा स्टेडियम का निर्माण करवाया गया है।