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यहां लोगों ने जिंदा अधिकारियों के ही चढ़ा दिए फूल, नारियल और जला दी इनके नाम की अगरबत्ती

SIKAR PHED : पीने के पानी के लिए सीकर में जलदाय विभाग के अधिकारियों की भी पूजा की गई।

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लोगों ने इन अधिकारियों को इंद्रदेव की तरह पूजा और धूप, दीप, नारियल चढ़ाकर की स्तुति

सीकर.

बरसात के लिए इंद्रदेव की पूजा करते हुए तो लोगों को जरूर देखा होगा, लेकिन पीने के पानी के लिए सीकर में जलदाय विभाग के अधिकारियों की भी पूजा की गई। पूजन सामग्री नारियल, अगरबती, दीपक इत्यादि लेकर पेयजल की समस्या से परेशान लोग जलदाय कार्यालय पहुंचे और अधिकारी की टेबल पर समस्त सामग्री अर्पित कर दी। मामला सीकर के कारीगरान मोहल्ले व चांदपोल क्षेत्र का है। यहां पिछले काफी समय से पेयजल की समस्या बनी है।

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इन क्षेत्रों के दर्जनों लोग गुरुवार दोपहर में जलदाय विभाग पहुंचे। उन्होंने पहले तो अधिकारी के ऑफिस में नारियल व अगरबती की। हालांकि उस समय अधिकारी सीट पर नहीं थे, लेकिन कुछ देर बाद ही अधिकारी आ गए। विधिवत स्तुति के बाद लोगों ने अपनी समस्या बताई। इस दौरान जलदाय विभाग के कर्मचारियों की अभद्रता पर लोग एकबारगी आक्रोशित भी हो गए।

मोहल्लेवासी व कर्मचारियों के बीच आधे घंटे तक गरमा गर्मी का माहौल रहा। मोहल्लेवासियों का आरोप है कि पिछले चार साल से इसी तरह मोहल्ले में पानी की समस्या चल रही है। हर बार अधिकारी झूठा आश्वासन देकर टरका देते हैं। लोगों ने चेताया कि शुक्रवार शाम तक पानी की समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। इधर जलदाय विभाग के सहायक अभियंता लक्ष्मणदास जाटव का कहना है कि पंप हाउस खराब होने से समस्या बन गई। अब पंप हाउस सुधरवा दिया गया है।

भट्टी की तरह तपा शेखावाटी, फतेहपुर 43.2 डिग्री, लोग घरों में रहे कैद

सीकर. शेखावाटी में गुरुवार को गर्मी ने जमकर सितम ढहाया। सीकर में सुबह दस बजे से भीषण गर्मी का दौर शुरू हो गया। दिन में तपन भरी हवाओं से आम जन-जीवन बुरी तरह से बेहाल रहा। फतेहपुर कृषि अनुसंधान केन्द्र पर अधिकतम तापमान 43.2 और न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री रहा। मौसम विशेषज्ञ ओपी कालश ने बताया कि विक्षोभ के कारण तापमान में कुछ गिरावट आई।

इधर, नौतपा 25 मई से शुरू होगा। मंगल और केतु का संयोग इस बार रोहिणी में प्राकृतिक आपदाओं की स्थितियां बनाएगा। इस बीच मौसम में एक साथ कई बदलाव आएंगे। वर्तमान में मंगल और केतु का संयोग बन रहा है। इन दोनों के साथ होने से प्राकृतिक आपदाओं की स्थितियां बनती हैं, जिससे भीषण गर्मी, आंधी-तूफान के साथ तेज हवा, आगजनी, दुर्घटनाएं व राजनीतिक उथल-पुथल की स्थितियां रहेंगी।