
गंभीर बीमारी और गर्भनाल में इंफेक्शन के चलते शिशुओं का गर्भ में ही घुट रहा दम
ब्लड ग्रुप निगेटिव होने पर भी होती है दिक्कत
सिंगरौली. गर्भ में शिशुओं की मौत का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। इस वर्ष जनवरी से 10 मई तक 26 बच्चों ने गर्भ में दम तोड़ दिया है। इसके पीछे कारण चाहे जो भी हो मगर चिकित्सक मां को बीमारी और गर्भ में बच्चा सहित गर्भनाल में इंफेक्शन को प्रमुख कारण मान रहे हैं। स्त्री एवं प्रसूता रोग विशेषज्ञ डॉ. यूके ने बताया कि शहर के मलीन बस्तियों में ङ्क्षसप्लेक्स, सैलो व बैगा बस्ती के अलावा ग्रामीण अंचल की आदिवासी क्षेत्र की महिलाएं गर्भधारण करने के बाद जांच कराने में बहुत देर कर देती हैं। जिससे उनके एनीमिक होने का पता नहीं चल पाता है।
गर्भवती महिलाएं बीमारियों से पीडि़त होती है, शिशु को बचाना होता है मुश्किल
बताया गया है कि गर्भवती महिलाएं भी शुगर, ब्लड प्रेशर, किडनी व थायराइड जैसे कई तरह की बीमारियों से पीडि़त रहती हैं। ऐसी स्थिति में गर्भ में पल रहे शिशु को बचाना मुश्किल होता है। कई बार ऐसा भी होता है कि गर्भ दो बच्चों के होने से भी उन्हें बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। इसके अलावा यदि ब्लड ग्रुप निगेटिव है तो इससे भी शिशु को बचाने में दिक्कत होती है।
कई तरह की हो सकती हैं समस्याएं
गर्भवती महिलाओं को अधिक से अधिक सतर्कता बरतने की जरुरत है क्योंकि गर्भ में पल रहे बच्चे पर बुरा असर होता है। मां जो भी खाती है, वो सीधा बच्चे को मिलता है। दूषित हवा में सांस लेने का असर भी बच्चे पर हो सकता है। इससे प्री-मेच्योर डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है। जन्म के समय बच्चे का वजन कम होने के साथ ही कुपोषण की भी समस्या हो जाती है।
इससे भी रहता है खतरा
गर्भ में शिशु का पूरी तरह से विकास नहीं होने पर।
मां का ब्लड प्रेशर बढऩे पर।
गर्भनाल मेें इंफेक्शन होने पर।
शिशुओं को गर्भ में चोट लगने पर।
मां का शुगर व बीपी बढऩे पर।
कोख मेंं दम तोड़ रहे बच्चों की स्थिति
महीना संख्या
जनवरी 06
फरवरी 05
मार्च 05
अप्रेल 06
10 मई तक 04
नोट: जिला अस्पताल से प्राप्त आंकड़ें प्रतिमाह
Published on:
12 May 2025 07:06 pm
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