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कोल खदानों में हादसों का सिलसिला जारी, करोड़ों की शावेल मशीन हुई खाक

एनसीएल के बीना परियोजना में हुई घटना ......

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production workload in coal mines, accidents increased suddenly in NCL

production workload in coal mines, accidents increased suddenly in NCL

सिंगरौली. वजह जो भी हो, लेकिन हकीकत यही है कि एनसीएल की विभिन्न परियोजनाओं में हादसों का सिलसिला जारी है। पहले ही जयंत, निगाही और दुद्धिचुआ में हैवी मशीनों के साथ हादसा हुआ और अब बीना में करोड़ों की साबेल मशीन में आग लगने की घटना हो गई है।

खदानों में महज दो महीने के भीतर हुई आधा दर्जन से अधिक घटनाओं में एक ओर जहां करोड़ों का नुकसान हुआ है। वहीं महज दो की मौत हो गई है। सोमवार को सुबह की पाली में बीना परियोजना के खदान क्षेत्र में हाड्रोलिक साबेल मशीन में अचानक से आग लग गई।

जब तक आग पर काबू पाया गया, तब तक मशीन का पिछला हिस्सा जल कर खाक हो गया। मशीन में आग लगने से वहां करीब एक घंटे तक अफरा-तफारी मची रही। मौके पर मौजूद अधिकारियों की सूचना पर पहुंची दमकल मशीनों ने आग पर काबू पाया, जिससे मशीन पूरी तरह से खाक होने से बच गई।

केवल पीछे का हिस्सा आग के हवाले हुआ। हालांकि इसमें भी करोड़ों का नुकसान बताया जा रहा है। घटना के संबंध में जनसंपर्क अधिकारी रामविजय सिंह का कहना है कि मशीन को आंशिक रूप से क्षति पहुंची है। घटना कैसे हुई, इसकी जांच की जा रही है।

अधिकारियों के मुताबिक शॉवेल मशीन डंपर जैसे वाहनों में कोयला लोडिंग का कार्य करती है। इसकी लागत करीब 18 करोड़ रुपए बताया गया है। घटना में मशीन में एक करोड़ से अधिक का नुकसान माना जा रहा है। जांच के बाद नुकसान का सही आकलन हो सकेगा।

घटना के वक्त मशीन का आपरेटर लंच पर था, इसलिए वह सुरक्षित रहा। बाकी दूसरे कर्मचारियों को भी कोई हानि नहीं हुई है। केवल एनसीएल की खदानों में पिछले डेढ़ से दो महीनों में आधा दर्जन घटनाएं हुई हैं। अगस्त में ही दो तारीख को दुद्धिचुआ खदान में हैवी डंपर होलपैक सीएचपी के हॉपर में जाकर पलट गया था। इस में आपरेटर को चोट आई थी।

इससे एक दिन पहले इसी खदान में वाटर टैंकर वाहन ने एक बोलेरों को टक्कर मार दी थी। इससे पहले जुलाई में एक डंपर के हेड के नीचे दबने से एक कर्मी की मौत हो गई थी। इसी तरह निगाही व जयंत खदान में भी तीन घटनाएं दो महीने के भीतर हो चुकी है। जिसमें एक आपरेटर की मौत हो चुकी है।