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जिले में अनूठी पहल: मां ज्वाला को साक्षी मान परिणय सूत्र में बंधे 13 जोड़े

बारात पहुंचते ही बजने लगे ढोल-नगाड़े

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Unique initiatives in the district: 13 couples tied in conclusions

Unique initiatives in the district: 13 couples tied in conclusions

सिंगरौली. शक्तिपीठ मां ज्वाला देवी मंदिर की भव्य में उस समय चार चांद लग गया, जब गरीब परिवार के बच्चियों का विवाह शुरू हो रहा था। समूचा क्षेत्र ढोल-नगाड़े से गुंजायमान होकर देवी-देवताओं को इस बारात का साक्षी बनाया जा रहा था। यह भव्य नजारा देखकर हर किसी का मन मोह रहा था कि इस अनूठी पहल में अपनी सहभागिता निभाया जाय। ऐसा कुछ देखने को भी मिला। जहां कई संस्थाओं ने इस विवाह में अपनी सहभागिता बढ़-चढ़ कर निभाया है। एक तरफ ढोल नगाड़े बज रहे थे, वहीं दूसरी ओर 13 जोड़े मां ज्वाला को साक्षी मानकर फेरे ले रहे थे। इस आयोजन में सबसे महती भूमिका निभाने वाले मां ज्वाला शक्तिपीठ के प्रधान पुजारी श्लोकी प्रसाद मिश्र की चहुंओर प्रशंसा हो रही है और ऐसे आयोजन को लगातार कराये जाने की भी मांग अब होने लगी है।

प्रधान पुजारी ने की प्रशंसा
बताते चलें कि मां शक्तिपीठ ज्वालामुखी मंदिर मे बीते शुक्रवार को दिव्य अखंड ज्योति के छठवें वार्षिकोत्सव के अवसर पर मंदिर के प्रधान पुजारी श्लोकी प्रसाद मिश्र के नेतृत्व में संरक्षक मण्डल की देख रेख में गरीब कन्याओं का सामूहिक विवाह का भव्य आयोजन व रात्रि देवी जागरण का कार्यक्रम सकुशल सम्पन्न हो गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सोनभद्र के व्यवसायी व प्रमुख समाजसेवी वृषभान अग्रवाल ने गणेश प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित करते हुए किया। इसके बाद लायन्स स्कूल शक्तिनगर बालिकाओ और शिक्षिकाओं ने संगीतमय स्वागत गीत प्रस्तुत किया। इसी स्कूल की बालिकाओं ने बारात मन्दिर के मुख्य द्वार पर पहुंचने पर सर पर कलश दिखा बारात की अगवानी की। तत्पश्चात दोपहर 3 बजे से सामूहिक विवाह प्रारंभ किया गया। जहां विधि विधान से 13 जोड़ों ने मां शक्तिपीठ को साक्षी मानकर साथ जीने-मरने की कसमें खाकर परिणय सूत्र में बंधे।

सामूहिक विवाह में भारी संख्या में पहुंचे लोग
इस सामूहिक विवाह में भारी संख्या में क्षेत्र की जनता पहुंची और बारातियों के स्वागत में इस तरह लगी कि शायद यह विवाह घर में होता तो इतनी साज-सज्जा और स्वागत न हो पाती। सामूहिक विवाह कार्यक्रम में वर को शेरवानी, सर्ट, पैंट, गमछा, सेहरा, जूता वितरित किया गया। वहीं कन्याओं को लहंगा, चुनरी, सेट, साड़ी, ब्लाउज, सिलाई मशीन, रजाई, चादर, तकिया, श्रंगार सामान, बाक्स, मंगलसुत्र, पायल, बिछिया, मिष्ठान, ब्राह्मण वस्र, बर्तन सेट, थाली कटोरी, भगौना, चम्मच, ग्लास, लोटा, टिफि न बाक्स, सुहाग का सामान, विदाई के तौर पर दिया गया। इसके बाद प्रधान पुजारी सहित संरक्षक मण्डल और मुख्य अतिथि व बड़े बुजुर्गों ने सभी को आशीर्वाद दिया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर विदा किये। तत्पश्चात शाम पांच बजे से विशाल भंडारा शुरू हुआ जो देर रात तक चलता रहा।