4 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भयावह स्थिति: जिले की जीवनदायिनी काचन डैम में सिर्फ तीन क्यूबिक मीटर पानी

महज 11 हजार हेक्टेयर में हो सकेगी सिंंचाई

2 min read
Google source verification
very-less-water-in-kanchan-dam

very-less-water-in-kanchan-dam

सिंगरौली. जिले की जीवनदायिनी काचन डैम में सिर्फ तीन क्यूबिक मीटर मीटर पानी भरा है। ऐसे में धान की फसल पर सूखे की मार असर करने लगी है। अभी धान की फसल को कम से कम दो पानी की जरूरत है। कृषि उपसंचालक आशीष पाण्डेय ने जल संसाधन विभाग से बांधों में पानी की रिपोर्ट तलब किया है। जिले में सिंचाई के लिए २७ बांध व तालाब हैं। उनमें से सबसे बड़ा काचन डैम है। इस बांध के जरिए ३२ गांवों की सिंचाई होती है।

कम बारिश से बिगड़ी बांधों की हालत
इसकी जल भंडारण क्षमता 25 मिलियन घन मीटर है। कम बरसात होने से इस साल बांध में सिर्फ 10 मिलियन घन मीटर पानी का भंडारण हो सका। जबकि जिले में सिंचाई के लिए 40 मिलियन घन मीटर पानी की जरूरत है। मगर, जिले के सभी 27 बांधों व तालाबों की स्थित बेहद खराब है। कम बरसात होने से बांधों में पानी की मात्रा बहुत ही कम है।

किसानों के लिए बांध खोल दिया गया
जलसंसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री आरएएस कौशिक ने कहा कि जिले का सबसे बड़ा बांध काचन है। इसमें सिर्फ तीन मिलियन घन मीटर पानी शेष है। इस साल पानी न गिरने से बांध सिर्फ 40 प्रतिशत ही भर सका। फिलहाल बांध को खोल दिया गया है।

ऐसी है अन्य बांधों की स्थिति
जिले के सभी २७ बांधों एवं तालाबों की भंडारण क्षमता 71.52 मिलियन घन मीटर की है। जबकि पानी का भंडारण सिर्फ 40 मिलियन घन मीटर ही हो सका है। 40 मिलियन घन मीटर पानी से खरीफ सीजन में एक बार पानी दिया जा सकता है। जबकि अभी भी धान की फसल को दो पानी की जरूरत है। जानकारी के लिए बता दें कि उमराह डैम में वर्तमान समय में शून्य प्रतिशत पानी का भंडारण है। चितरंगी डैम सिर्फ 18 प्रतिशत ही भर सका। नोडो डैम 49 प्रतिशत भरा है। बसौरा डैम में 33 प्रतिशत पानी भरा है। अहिला डैम में 41 फीसदी ही भर सका। तिलदह डैम 28 प्रतिशत भर सका है। सोहिला डैम 37 फीसदी भर सका। बलिया डैम 56 प्रतिशत ही भर सका। मझौली डैम 57 प्रतिशत ही भर सका। कोई भी डैम इस साल क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक नहीं भर सका।

48 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई
जिले में इस साल 48 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई की गई है। अब सवाल यह कि पानी न गिरने से सूखे के हालात बनते जा रहे हैं। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, मौजूदा वक्त में जिले के सभी बांधों व तालाबों की जल भंडारण क्षमता सिर्फ 11 हजार हेक्टेयर की है।

सामान्य से कम वर्षा
इस साल जिले में सामान्य से कम बारिश हुई है। जिले में औसतन 841 मिमी बारिश हुई है। जबकि सामान्य वर्षा 1232 मिमी रेकॉर्ड है। इस तरह से सामान्य से भी कम बारिश हुई है।