
बीके अवतार @ माउंट आबू। ग्वारपाठा बेकार पड़ी भूमि व असिंचित भूमि में भी उगाया जा सकता है। इस बहुवर्गीय पौधे को विशेष देखभाल की भी आवश्यकता नहीं होती। इसकी बिक्री के लिए किसी भी आयुर्वेदिक फार्मेसी अथवा प्रसंस्करण इकाइयों से संपर्क किया जा सकता है।
इसकी बुवाई जुलाई -अगस्त में की जाती है। खेत की जुताई के समय गोबर की खाद डालकर मिट्टी में मिला दें। रासायनिक उर्वरकों के उपयोग की इसमें आवश्यकता नहीं होती है।
पौधा लगाने के एक वर्ष बाद हर तीन महीने में प्रत्येक पौधे की तीन चार पंक्तियों को छोड़कर शेष को तेज धार वाले चाकू से उसके जुड़ाव बिंदु से अलग कर देना चाहिए। इस तरह आप लगातार उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
बुवाई के लिए कंदों (ट्यूबर्स) का उपयोग करें। यह कंद पुराने पौधों की जड़ों में होती है। नर्सरी से भी कंद ले सकते हैं। इससे निकले छोटे पौधों को तैयार खेतों में 50-50 सेंटीमीटर की दूरी पर रोप दिया जाता है। प्रत्येक दो पंक्तियों के बीच कृषि कार्यों जैसे उर्वरकों का छिड़काव, हार्वेस्टिग आदि के लिए पर्याप्त स्थान छोड़ें। इस प्रकार एक हेक्टेयर खेत में लगभग 40 हजार पौधे रोपित किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञ गुरदर्शन सिंह ने बताया, यह एक औषधीय फसल है। इसका उपयोग आयुर्वेदिक दवाइयां तथा सौंदर्य प्रसाधन सामग्री तैयार करने में किया जाता है। एंटीसेप्टिक गुणों से भरपूर ग्वारपाठा डायबिटीज के साथ ही घाव भरने व दर्द में भी राहत पहुंचाता है। इसके अलावा चर्म रोग, पीलिया, खांसी, बुखार, पथरी, सांस आदि रोगों में भी उपयोगी है।
Published on:
29 Aug 2024 04:35 pm
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