
आबूरोड तारंदर गली में उगी पार्थेनियम घास।
आबूरोड. बारिश के बाद जगह-जगह उगी गाजर घास परेशानी का सबब बनी हुई है। विभिन्न कॉलोनियों में खाली पड़े सैंकड़ों भूखण्डों और सडक़ किनारे बड़ी तादाद में गाजर घास के पौधे उगे हुए हैं, जो लोगों के लिए विशेषकर श्वास रोगियों के लिए मुसीबत का सबब बने हुए हैं। कई लोग तो इनके कारण विभिन्न समस्याओं से ग्रसित होने लगे हैं।
खाली स्थान पर कब्जा
गाजर घास स्वत: उगने वाली खरपतवार है जो खाली पड़े ऐसे स्थानों पर उगती है जहां साफ.सफाई नहीं होती है। ऐसे में विभिन्न कॉलोनियों के खाली भूखण्ड इनके लिए मुफीद जगह साबित होते हैं और ये आसानी से यहां उग जाती है। शहर के तारंदर गलिया, गांधीनगर, रेलवे कॉलोनी, आबकारी, पूनम, महालक्ष्मी, रीको एवं मानपुर मार्ग समेत कई ऐसी कॉलोनियां है, जहां कुछ में मकान बने हुए हैं तो कुछ भूखण्ड खाली पड़े हैं। इन भूखण्डों पर गाजर घास के पौधों ने कब्जा जमा लिया है।
यह होती है परेशानी
गाजर घास के चलते लोगों को एलर्जी व श्वास सम्बंधी गंभीर बीमारियां होने की आशंका रहती है। अस्थमा व अन्य श्वास के रोगियों के लिए तो गाजर घास काफी हानिकारक साबित होती हैं। गाजर घास के पौधों पर लगे फूलों के परागकण हवा मेें घुलकर सांस के जरिए नाक में प्रवेश कर जाते हैं जिसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। अधिकतर लोग गाजर घास के दुष्प्रभाव से अनभिज्ञ है। जो इन दुष्प्रभावों को जानते भी हैं, वे इसे नष्ट करने की पहल नहीं कर रहे हैं। ऐसे में जिले में प्रति वर्ष गाजर घास का दायरा बढ़ता जा रहा है।
संक्रमण की आशंका
गाजर घास के कारण होने वाली एलर्जी का यदि समय पर उपचार नहीं किया गया तो शरीर पर लगातार खुजली मचती रहती है। इससे खुले रहने वाले अंगों चेहरेए हाथ, गला, कान पर खुजली के कारण घाव हो जाते हैं। घाव से संक्रमण फैलता है।
फैलती है बीमारियां
गाजर घास कई रोगों का वाहक है। खासकर एलर्जी सम्बंधी रोग ज्यादा फैलते हैं। इसके आस-पास रहने वाले लोगों को एलर्जी या अन्य बीमारी होने पर चिकित्सकों से राय लेनी चाहिए।
डॉ एमएल हिन्डोनिया, चिकित्सा प्रभारी आबूरोड।
Published on:
19 Nov 2018 03:34 pm
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