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पनघट पर नहीं पानी, खेतों से लाने की मजबूरी

परेशानी: जूना सानवाड़ा में सौर ऊर्जा संयंत्र नाकारा

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सिरोही. पिण्डवाड़ा राजमार्ग से सटे जूना सानवाड़ा में फ्लोराइड मुक्त पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए सौर ऊर्जा चलित पनघट योजना नाकारा साबित हो रही है। ग्रामीणों को ठेकेदारों और अधिकारियों की अनदेखी के चलते योजना का फायदा नहीं मिल रहा है। भाटवास में सार्वजनिक पेयजल वितरण व्यवस्था के लिए करीब नौ लाख की लागत से सौर ऊर्जा चलित पनघट तो लगा दिया लेकिन ग्रामीणों को इसका लाभ कुछ दिन ही मिला। पनघट करीब छह माह से बंद है। वर्तमान में पीने का पानी करीब आधा किलोमीटर दूर खेतों से लाना पड़ रहा है। पनघट को जिस हैण्डपम्प से जोड़ा गया था, उसमें खारा पानी था। यह सिस्टम बंद होने के कारण पशुओं को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। जरेरी माता मंदिर मार्ग पर गांव के मुहाने पर बनी टंकी भी खाली है।
यह हुआ था
सौर ऊर्जा चलित पनघट योजना के लिए जलदाय विभाग ने एक नलकूप पर लोहे का स्ट्रक्चर खड़ाकर पांच हजार लीटर क्षमता की टंकी रखवाई। ठेकेदार ने मोटर चलाने के लिए सौर ऊर्जा चलित सिस्टम स्थापित किया। सिस्टम में स्वचालित लेवल कंट्रोलर व इंडिगेटर लगाया। टंकी के भराव क्षमता के लेबल पर आते ही नलकूप की मोटर स्वत: ही बंद हो जाती है।
बंद पड़ी हैं रोडलाइटें
रात को गलियों में अंधेरा पसरा रहता है, अधिकतर रोडलाइटें बंद पड़ी रहती हैं।सभी लाइटें सौर ऊर्जा की हैं लेकिन सार संभाल नहीं होती है। इससे बारिश के समय में गलियों से गुजरने के दौरान जहरीले जंतुओं का भय सताता रहता है। रात को गलियों में अंधेरा पसरा रहता है, अधिकतर रोडलाइटें बंद पड़ी रहती हैं।सभी लाइटें सौर ऊर्जा की हैं लेकिन सार संभाल नहीं होती है। इससे बारिश के समय में गलियों से गुजरने के दौरान जहरीले जंतुओं का भय सताता रहता है।
&प्लांट अन्य हैण्डपंप पर लगाने को कहा था लेकिन नहीं माने। इससे थोड़े दिन तो खारा पानी आयाऔर वह भी बंद हो गया। अब वापस आस-पास के कुओं से पानी लाना पड़ रहा है।
- रूपी, भाटवास, जूना सानवाड़ा
सार संभाल नहीं
&लाखों की लागत से प्लांट तो लगा दिया लेकिन इसकी सार संभाल नहीं हो रही है। अबकी बार बारिश नहीं आई तो पानी के लिए और दूर का सफर करना होगा।
-मजीया देवी, भाटवास, जूना सानवाड़ा