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राजस्थान में राजनाथ सिंह ने कहा- आज भारत जब बोलता है तो पूरी दुनिया कान लगाकर सुनती है

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक योगी और सैनिक में खास अंतर नहीं बताते हुए कहा कि साधक के जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य और ध्येय मानवता की सेवा करना ही होता है। सैनिक और साधक दोनों एक सुरक्षित, बेहतर और शांतिपूर्ण समाज की स्थापना के लिए कार्य करते हैं।

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Rajnath singh

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सैनिक और साधक को एक समान बताते हुए कहा है कि सुरक्षा बलों के जवानों के समर्पित होकर काम करने से आज भारत राष्ट्र के रूप में चारों ओर से सुरक्षित है और दुनियाभर में तमाम अनिश्चितताओं के बावजूद भारत प्रगति कर रहा है। सिंह ने सोमवार को यहां ब्रह्माकुमारीज संस्थान के मुख्यालय शांतिवन में सुरक्षा सेवा प्रभाग द्वारा शुरू किए जा रहे देशव्यापी स्व सशक्तिकरण से राष्ट्र सशक्तिकरण (सेल्फ एम्पॉवरमेंट) अभियान की दीप प्रज्जवलन कर लांचिंग की और पांच दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित किया।

'मानसिक शक्ति होना भी जरूरी'

उन्होंने कहा कि हमारे जवान सीमाओं पर महीनों गुजार देते हैं, परिवार से कोई संपर्क नहीं हो पाता है। ऐसे वीर जवानों की वजह से ही भारत के लोग चैन की सांस ले पा रहे हैं। सैनिक घने जंगलों से लेकर ग्लेशियर के बीच लड़ाइयां लड़ते हैं। इसके लिए भुजबल के साथ मानसिक शक्ति होना भी जरूरी है और सैनिक को विपरीत परिस्थिति में लड़ने की ऊर्जा उनके अंतर्मन से आती है। लंबे समय तक विपरीत परिस्थितियों में सेवा करने के कारण सैनिक का मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है, ऐसे में ब्रह्माकुमारीज़ का सैनिक के कल्याण के लिए आगे आना सराहनीय कदम है।

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'योगी और सैनिक में खास अंतर नहीं'

उन्होंने एक योगी और सैनिक में खास अंतर नहीं बताते हुए कहा कि साधक के जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य और ध्येय मानवता की सेवा करना ही होता है। सैनिक और साधक दोनों एक सुरक्षित, बेहतर और शांतिपूर्ण समाज की स्थापना के लिए कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि आज एआई का दौर चल रहा है। हमें देश-दुनिया की पल-पल की खबरें पता चल रही हैं, लेकिन हमें यह पता नहीं चल रहा है कि हमारे भीतर क्या चल रहा है। हम पूरी दुनिया की खबर रखते हैं, लेकिन अपनी खबर नहीं रखते हैं।

सिंह ने कहा कि कई साल पहले दुनिया के देशों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यदि कोई जाकर बोलता था तो भारत की बातों को उतनी गंभीरतापूर्वक नहीं लिया जाता था, लेकिन आज भारत का कद और सिर इतना ऊंचा हो गया है कि भारत जब बोलता है तो पूरी दुनिया कान लगाकर सुनती है। उन्होंने कहा कि इस अभियान की थीम 'आत्म सशक्तिकरण से राष्ट्र सशक्तिकरण' जो अपने आप में बेहद दिलचस्प है। पूरी दुनिया में फिलहाल इस तरह की स्थितियां हैं। इसलिए यह थीम और भी प्रासांगिक हो जाती है। यह कैंपेन राष्ट्र को और मजबूत करेगा।

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