22 जून 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राजस्थान का ‘मिनी ब्राजील’ बना सिरोही का उड़वारिया गांव, खिलाड़ियों ने कोच को दी अनोखी गुरु दक्षिणा

Football Village Rajasthan: दुनिया इन दिनों फीफा विश्वकप-2026 के रोमांच में डूबी है। बड़े-बड़े स्टेडियमों में गोल की गूंज के बीच राजस्थान के सिरोही जिले का छोटा सा उड़वारिया गांव भी अपने फुटबॉल जुनून से अलग पहचान बना रहा है। कभी संसाधनों और खेल सुविधाओं के अभाव से जूझने वाला यह गांव आज राजस्थान में ‘मिनी ब्राजील’ के नाम से जाना जाने लगा है।

3 min read
Google source verification

सिरोही

image

Anand Prakash Yadav

image

सत्यप्रकाश शर्मा/ भरत प्रजापत

Jun 22, 2026

Udwariya Village,Mini Brazil of Rajasthan

उड़वारिया गांव में ​फुटबॉल कोच को दी अनोखी गुरुदक्षिणा,पत्रिका फोटो

Football Village Rajasthan: दुनिया इन दिनों फीफा विश्वकप-2026 के रोमांच में डूबी है। बड़े-बड़े स्टेडियमों में गोल की गूंज के बीच राजस्थान के सिरोही जिले का छोटा सा उड़वारिया गांव भी अपने फुटबॉल जुनून से अलग पहचान बना रहा है। कभी संसाधनों और खेल सुविधाओं के अभाव से जूझने वाला यह गांव आज राजस्थान में ‘मिनी ब्राजील’ के नाम से जाना जाने लगा है। यहां की गलियों में बच्चों के कदम फुटबॉल के साथ आगे बढ़ते हैं और युवाओं के सपनों में भी जीत और फुटबॉल का ही जुनून दिखाई देता है।

इस बदलाव के केंद्र में हैं राजकीय विद्यालय उड़वारिया के शारीरिक शिक्षक एवं फुटबॉल कोच रतन सिंह कुम्पावत। उनके सतत प्रयासों ने गांव की खेल संस्कृति को नई दिशा दी। वर्ष 2003 में उनकी नियुक्ति के समय विद्यार्थियों को फुटबॉल के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन उनके लगातार प्रयासों का नतीजा रहा कि आज गांव के 150 से अधिक खिलाड़ी राज्य स्तर और 4 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं।

2007-08 में भेजी पहली टीम, रही विजेता

फुटबॉल कोच रतन सिंह ने वर्ष 2007-08 में स्कूल की अंडर 14 वर्ग की पहली फुटबॉल टीम तैयार कर जिला स्तरीय स्कूली प्रतियोगिता में भेजी, जो प्रथम विजेता रही। इसके बाद जीत का सिलसिला चल पड़ा। कभी प्रथम, कभी द्वितीय और कभी तृतीय स्थान प्राप्त करते हुए उड़वारिया की टीम ने जिले में अपनी अलग पहचान बनाई।

राजस्थान ने 55 साल बाद रचा इतिहास

उड़वारिया के खिलाड़ी मुकेश चौधरी ने संतोष ट्रॉफी में राजस्थान फुटबॉल टीम की कप्तानी करते हुए प्रदेश को 55 वर्ष बाद 2026 में सुपर-8 तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। यह उपलब्धि प्रदेश के इतिहास की बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। गांव के इस खिलाड़ी की सफलता ने उड़वारिया को प्रदेश के फुटबॉल मानचित्र पर नई पहचान दिलाई।

150 खिलाड़ी राज्य और 4 नेशनल तक पहुंचे

उड़वारिया गांव अब फुटबॉल खिलाड़ियों को गढ़ने वाला केंद्र बनकर उभरा है। यहां से अब तक 150 से अधिक खिलाड़ी राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं और चार खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं। वर्ष 2017 में गांव के हुनर ने पहली बार नेशनल खेलकर इतिहास रचा। इसके बाद भावेश, मुकेश और वीराराम ने भी नेशनल खेलकर अपनी पहचान बनाई। गत छह वर्षों से जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं में उड़वारिया स्कूल की अंडर-17 और अंडर-19 फुटबॉल टीम लगातार विजेता बन रही है।

900 किलो के फुटबॉल सर्किल से कोच को अनोखी गुरु दक्षिणा

गांव में फुटबॉल के बढ़ते जुनून को देखकर जनसहयोग से स्कूल परिसर में जिले का एकमात्र अत्याधुनिक लोन युक्त फुटबॉल ग्राउंड तैयार किया है। गांव के प्रशासक एवं फुटबॉल खिलाड़ी जैताराम चौधरी के नेतृत्व में बने इस मैदान में फ्लड लाइट्स की व्यवस्था है, ताकि खिलाड़ी रात में भी अभ्यास कर सकें। गांव के खिलाडिय़ों ने मिलकर गुरु दक्षिणा के रूप में कोच रतन सिंह कुम्पावत के सम्मान में 900 किलो से अधिक वजनी पत्थर की प्रतीक स्वरूप फुटबॉल लगाकर सर्किल बनाया है, जो गांव की पहचान बन चुका है।

भारतीय टीम में देखना चाहता हूं उड़वारिया के खिलाड़ी

वर्ष 2003 में उड़वारिया स्कूल में मेरी नियुक्ति हुई, तब बच्चों को फुटबॉल के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। विद्यार्थियों को खेल के प्रति प्रेरित किया और नियमित अभ्यास शुरू करवाया। धीरे-धीरे बच्चों का रुझान बढ़ा और आज गांव के 150 से अधिक खिलाड़ी राज्य स्तर तक पहुंच चुके हैं, जबकि चार खिलाड़ी नेशनल खेल चुके हैं। हमारा प्रयास है कि उड़वारिया के खिलाड़ी भविष्य में भारतीय फुटबॉल टीम तक पहुंचे।
रतन सिंह कुम्पावत, फुटबॉल कोच, उड़वारिया