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जिम्मेदार मौन: सिरोही में यह कारोबार चलता हैं बिना लाइसेंस कें…

-जिले में वर्ष-2016 के बाद एक भी लाइसेंस जारी नहीं किया गया

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सिरोही. जिले में आरओ प्लांट के नाम पर पानी बेचने का कारोबार फलफूल रहा है। हाल यह है कि शहर में कई स्थानों पर मनमर्जी से आरओ प्लांट लगे हुए हैं। लेकिन खाद्य सुरक्षा के तहत अधिकांश ने भी लाइसेंस तक नहीं लिया है। ऐसे में अवैध रूप से आरओ प्लांट का धड़ल्ले से संचालन किया जा रहा है। जिले में वर्ष-2016 से अब तक आरओ प्लांट के लिए एक भी लाइसेंस जारी नहीं किया गया है। बावजूद इसके कार्रवाई को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में जाहिर है कि इन आरओ प्लांट से बेचा जा रहा पानी गुणवत्तापूर्ण है, इसकी कोई गारंटी नहीं है। ऐसे में भीषण गर्मी के दौर में शीतल पानी पीने के चक्कर में उपभोक्ता इस बात से बेखबर है कि वे जो पानी पी रहे हैं, वो मापदंड पर खरा उतर रहा है या नहीं। इन आरओ वाटर के नाम पर शहर में इन दिनों रोजाना हजारों लीटर पानी की सप्लाई हो रही है, लेकिन वो पानी पीने योग्य है या नहीं इससे उपभोक्ता बेखबर है। शहर में कैम्पर में जो पानी सप्लाई हो रहा है, उसकी जिम्मेदार विभाग के अधिकारी जांच करने की भी जहमत नहीं उठा रहे हैं। लापरवाही का आलम यह है कि पिछले लम्बे समय से आरओ प्लांट से पानी के सैम्पल तक नहीं लिए गए हैं। जबकि, नियमानुसार विभाग को हर माह सैम्पल लेने चाहिए।

नियमों से भी अनजान अधिकारी
चौंकाने वाली बात तो यह है कि खाद्य सुरक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी नियमों से अनजान है। इन आरओ प्लांट पर सैम्पल व कार्रवाई को लेकर जब खाद्य निरीक्षक दिलीपसिंह यादव से बात की गई तो उनका कहना था कि 'हम केवल बंद बोतल के पानी का ही सैम्पल ले सकते हैं। खुले कैम्पर में बिकने वाले पानी के सैम्पल भरने का अधिकार डिप्टी सीएमएचओ (स्वास्थ्य) के पास है। इधर, जब डिप्टी सीएमएचओ (स्वास्थ्य) डॉ. राकेश कुमावत से बात की गईतो उनका कहना था कि 'हमारा काम केवल फील्ड कार्मिकों की ओर से लिए जाने वाले सैम्पल की जांच कराना व मॉनिटरिंग करना है। आरओ प्लांट पर सैम्पल लेने का अधिकार खाद्य सुरक्षा अधिकारी को है।Ó

यह है आरओ प्लांट के नियम
आरओ प्लांट के लिए लाइसेंस अनिवार्य है। इसकी समय-समय पर जांच भी जरूरी होती है। प्रतिमाह पीएचईडी लैब में पानी के सैम्पल की जांच अनिवार्य रूप से करवानी होती है। जांच रिपोर्ट प्लांट स्थित बोर्ड पर लिखनी होती है। इसकी जांच खाद्य निरीक्षक करते हैं।

किसी को नहीं पता पानी की शुद्धता
शहर में आरओ वाटर के नाम से पानी सप्लाई करने वाले करीब 8-10 प्लांट लगे हुए हैं। इनसे रोजाना हजारों लीटर पानी की सरकारी, निजी कार्यालयों, दुकानों, घरों, विभिन्न समारोह में सप्लाई हो रही है। पानी में कितने बैक्टीरिया है, पानी में टीडीएस की मात्रा कितनी है। यह जानकारी ने फिल्टर प्लांट संचालकों के पास है और न ही स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों को इसका पता है।

इनका कहना है...
आरओ प्लांट पर सैम्पल भरने को लेकर अभियान चलाया जाएगा। वहीं नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-दिलीपसिंह यादव, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, सिरोही


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