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सिंदरथ के इस लाल को सलाम…दुकान की नौकरी छोड़ खेती की, अब हर महीने कमा रहे 6 लाख रुपए

-जिला मुख्यालय के समीप सिंदरथ के प्रगतिशील किसान दुर्गेश कुमार उकाराम माली की कहानी

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सिरोही से भरत कुमार प्रजापत की रिपोर्ट

सिरोही. रोजगार की तलाश में गांव के युवा शहर की ओर पलायन करते हैं, लेकिन सिरोही जिले में एक ऐसा भी शख्स हैं, जिन्होंने शहर को छोड़ कर गांव में खेती करने की ठनी। उनको बचपन से ही खेतीबाड़ी करने का शौक था। ऐसे में उन्होंने कपड़े की दुकान से नौकरी छोडक़र गांव में खेती करना शुरू कर दिया। खेती में उन्होंने इतनी सफलता हासिल कर ली कि आज गांव का हर व्यक्ति उन पर गर्व करता है। यह सफलता की कहानी है जिला मुख्यालय के समीप सिंदरथ गांव के प्रगतिशील किसान दुर्गेश कुमार उकाराम माली की। परिवार का भरण-पोषण करने के लिए दुर्गेश पुणे शहर में कपड़े की दुकान पर नौकरी करने चले गए।तभी अचानक उनके मन में विचार आया कि जितनी मेहनत में यहां कर रहा हूं, उतनी मेहनत गांव में रहकर कर लूं, तो इससे भी आगे निकल सकता हूं। इसके बाद वर्ष १९९८ में कपड़े की दुकान से नौकरी छोड़ कर गांव आ गए। यहां उन्होंने खुद के कृषि कुएं पर खेती करना शुरू किया। खेतीबाड़ी को बढ़ाने के लिए उन्होंने जिले के प्रगतिशील किसानों व कृषि विभाग के अधिकारियों से सलाह लेनी शुरू की। अब वे करीब २०० बीघा में अलग-अलग फसलों की बुवाई कर हर महीने औसत ६ से ७ लाख रुपए कमा रहे हैं।

४० बीघा में फूलों की खेती
दुर्गेश ने बताया कि कृषि कुएं पर करीब ४० बीघा में फूलों की खेती कर रखी है। जिसमें १० बीघा में तो गुलाब के फूल लगाए गए हैं। वहीं ३० बीघा में बिजली के फूल, गेंदा, नौरंगी के फूल लगाए गए हैं। जिससे प्रति महीने करीब ४-५ लाख रुपए की कमाई हो जाती है। वहीं नींबू के ५० पौधे भी लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि केला, पपीता, अनार के पौधे भी लगाने हैं। हालांकि उन्होंने प्रयोग के लिए दो-दो पौधे लगाए हुए हैं। वहीं पोली हाऊस बनाना चाहते हैं।

यहां होती है फूलों की सप्लाई
इनके कृषि कुएं से फूलों की सप्लाई सिरोही, पिण्डवाड़ा, कालन्द्री, भीनमाल, रामसीन, जालोर, आबूरोड, शिवगंज समेत अन्य शहरों में होती है।

नई तकनीकी का प्रयोग
दुर्गेश ने बताया कि फूलों की खेती के साथ-साथ अन्य फसलों की खेती कर रखी है।जिसमें ४० बीघा में अरण्डी, ७० बीघा में गेहूं, ३० बीघा में सरसों, १० बीघा में चना, १० बीघा में ईसबगोल की खेती की हुईहै। इसके अलावा आस-पास के कुछ कृषि कुएं ठेके पर भी ले रखे हैं। उन्होंने बताया कि सात हैक्टेयर में ड्रीप से सिंचाई की जाती है। साथ ही जैविक खाद को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने कृषि कुएं पर आठ पशु भी रखे हैं। जिससे कुएं पर जैविक खाद तैयार करते हैं।

वर्ष २०१२-१३ में मिला था सम्मान
दुर्गेश ने बताया कि खेतीबाड़ी के सम्बंध में वर्ष २०१२-१३ में जयपुर में आयोजित राज्य स्तरीय सम्मान समारोह में उनकी माता जीवी देवी को मुख्यमंत्री ने स्मृति व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था। उन्होंने अन्य किसानों को भी नई तकनीकी से खेती करने की सलाह दी है। जिससे कम समय व कम मेहनत से उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है।

कृषि कुएं पर सोलर प्लांट भी
कृषि कुएं पर सोलर प्लांट भी लगा हुआ है। जिससे बिजली गुल हो जाने पर सोलर से सिंचाई की जाती है। वहीं खेतीबाड़ी करने के लिए कृषि यंत्र खरीद किए हुए हैं।


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