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सिरोही: किसानों को देनी थी जानकारी और वे ही नदारद!

प्रसार के अभाव में दम तोड़ गया कार्यक्रम, लगभग खाली रही कुर्सियां
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Rajendra Singh Denok

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Updated: 6 Dec 2016, 10:21 AM IST

किसानों को हरसंभव सहयोग व कृषि संबंधित योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए लाखों रुपए खर्च किए जा रहे है, लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी में योजनाएं दम तोड़ रही है। सोमवार को कृषि विज्ञान केन्द्र व कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में केवीके में विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस मनाने के लिए जिला स्तरीय संगोष्ठी आयोजित की गई, लेकिन इसमें किसान ही नदारद दिखे।यहां तक कि हॉल में लगाई कुर्सियां तक खाली रही। प्रसार के अभाव में न तो जागरूकता हुई और न ही किसान पहुंच सके। यहां पहुंचे अधिकतर किसान भी केवल सॉयल हैल्थ कार्ड लेने आए थे। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मृदा स्वास्थ्य दिवस पर आयोजित जिला स्तरीय संगोष्ठी खानापूर्ति में ही सिमट गई। ऐसे में औपचारिक तौर पर आयोजित यह कार्यशाला दोपहर साढ़े तीन बजे ही खत्म हो गई।

एक बजे तक 40, फिर समापन
कार्यशाला में जिला प्रमुख, जिला कलक्टर, विधायक समेत अन्य जनप्रतिनिधि की अध्यक्षता में किसानों को सॉयल हैल्थ कार्ड वितरित करने थे। दोपहर एक बजे तक यहां कोई जनप्रतिनिधि तो दूर अधिकारी तक नहीं पहुंचा। बाद में जिला कलक्टर आए तथा कार्यक्रम को सम्बोधित किया। केवीके के मुख्यद्वार एक कर्मचारी बाहर से आ रहे किसानों की एंट्री व मोबाइल नम्बर रजिस्टर में दर्ज कर रहा था।

जैविक खेती पर जोर दिया
मृदा स्वास्थ्य दिवस कार्यक्रम में जिला कलक्टर अभिमन्यु कुमार ने जैविक खेती को बढ़ावा देने व मिट्टी की जांच करवाने की बात कही। आधुनिक युग में कृषि तकनीकी का उपयोग करने का आह्वान किया। जालोर के संयुक्त निदेशक वीआर सोलंकी ने मिट्टी की जांच आवश्यक रूप से करवाने का अनुरोध किया। उपनिदेशक जगदीशचन्द्र मेघवंशी ने मिट्टी की जांच के महत्व पर प्रकाश डाला। 14705 नमूनों की जांच कर 32507 किसानें को मृदा कार्ड जारी करना बताया। आत्मा परियोजना निदेशक के डॉ. प्रकाशकुमार ने पोषक तत्वों की कमी का प्रस्तुतीकरण किया।केवीके प्रभारी डॉं. जीआर वर्मा, सहायक निदेशक डॉ. हीरसिंह राठौड़, डॉ. केपीसिंह, कृषि अधिकारी खुमानसिंह, पन्नालाल, नवलकुमार मीणा आदि मौजूद थे।

नाममात्र की भागीदारी
बताया गया कि कार्यशाला मुख्य उद्देश्य किसानों को मृदा संरक्षण, उपजाऊपन बरकरार रखने की जानकारी देना था। लेकिन, विभाग की उदासीनता व जानकारी के अभाव में जिला स्तरीय संगोष्ठी में किसानों की भागीदारी नाम मात्र की रही। कार्यशाला में किसानों को मृदा स्वास्थ्य व खेत की भूमि को उपजाऊ बनाने की जानकारी देनी थी।साथ ही किसानों की विभिन्न समस्याओं का समाधान किया जाता।