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धूमधाम से हुआ विवाह तुलसी संग परणिया सालीग्राम

देवउठनी ग्यारस पर जगह जगह हुए धार्मिक अनुष्ठान

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आबूरोड. शहर समेत आस-पास में सोमवार को देवउठनी ग्यारस का पर्व उत्साह पूर्वक मनाया गया। घरों में आकर्षक रंगोली बनाई गई और घर को आकर्षक विद्युत साज-सज्जा के साथ सजाया गया। लोग दिन भर बाजारों में गन्ना, फल, फूल पूजन सामग्री सहित मिठाई की खरीदारी करते रहे। श्रद्धालुओं ने अपने घरों पर गन्ने का मंडप सजाकर तुलसी-शालिगराम भगवान के विवाह की रस्म निभाई गई। पूजन में सिंघाड़ा, बेर, आंवला, मूली, सीताफल मूंगफली सहित विभिन्न पकवानों का भगवान को भोग लगाया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने पूरे परिवार सहित भगवान की विधि-विधान से पूजा.अर्चना कर परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।
आनंद और उत्सव का है यह पर्व
तुलसी सालिगराम का विवाह एक रूपक प्रसंग नहीं है। अपिुत धर्मालंबियों द्वारा इस पर्व को आनंद और उत्सव के रूप में मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार देवता जब जागते हैं तो भगवान श्रीहरि विष्णु सबसे पहले तुलसी की प्रार्थना ही सुनते हैं। इसलिए तुलसी विवाह को देव जागरण के पवित्र मुहूर्त के स्वागत का उपक्रम भी माना जाता है।
अबकी बार सावे कम, करना होगा इतंजार
आबूरोड. दीपावली पर्व के बाद से ही घरों में शादी विवाह की तैयारियां शुरु हो जाती है। क्योंकि देवउठनी एकादशी के बाद से शादी के सावे रहते है। शहनाई के स्वर सुनाई देने लगते है। इसके चलते अक्सर नवंबर व दिसंबर में पूरे माह बैंड बाजे बजते है। लेकिन इस बार इन दो माह में विवाह के मुहूर्त कम है होने से सगाई के बाद शादी की बाट जोह रहे युवाओं को अगले साल का इंतजार करना होगा। अगले साल १५ जनवरी से शादी विवाह के सावे शुरु हो जाएंगे। इस बार देव उठनी एकादशी पर मात्र एक ही अबुझ शादी का शुभ मुहूर्त था, जिसमें शहर समेत जिलेभर में शादियां हुई है। शादी के कम मुहूर्त होने के कारण लाइट, टेंट, डेकोरेशन, हलवाई एवं फोटोग्राफर पहले से ही बुक है। कईयों ने तो एक दिन में दो-दो ऑर्डर बुक किए है। टैक्सियां भी काफी समय पहले बुक करवा रखी है।
यह है प्रमुख सावे
देवउठनी एकादशी के बाद २३, २४, २५, २८, २९ और ३० को सावा रहेगा। इसमें २४ को देव दिवाली है। दिसंबर माह में १, ३, ४, ९, १० व ११ को को सावा रहेगा। १६ दिसंबर से मलमास लगेगा। १६ दिसम्बर से धनु मलमास प्रारंभ हो जाएगा। फिर से एक माह के लिए शुभ व मांगलिक कार्यो पर रोक लगेगी। अगले साल १४ जनवरी को मकर संक्रांति के समापन के बाद १५ जनवरी से फिर से मांगलिक कार्य शुरु होंगे।