
सिरोही. शहर के दुधिया तालाब की मिट्टी को किनारे डालती हुई महिलाएं।
भरत प्रजापत/जितेन्द्रङ्क्षसह बारड़
सिरोही.पानी की कीमत पुरुषों की बजाए महिलाएं ज्यादा बेहतर जानती है। क्योंकि, ग्रामीण इलाकों में आज भी महिलाओं को दूर-दराज से सिर पर घड़ा रखकर पानी लाना पड़ता है। सिरोही में सारणेश्वर मंदिर के निकट दूधिया तालाब से मिट्टी हटाने में जुटी महिलाओं की कहानी जल संरक्षण के लिहाज से प्रेरणादायी है। करीब 15-20 महिलाओं ने तालाब की दशा सुधारने का बीड़ा उठाया है।
ये महिलाएं सुबह करीब 5 बजे तालाब पर पहुंचती है। मिट्टी तगारियों में भरकर तालाब की पाळ पार डालती है। महिलाओं के दिन की शुरुआत इसी काम से होती है। करीब दो घंटे तक प्रतिदिन इसी काम में जुटती है। करीब एक पखवाड़े में उन्होंने काफी मात्रा में तालाब से मिट्टी हटा दी है। बारिश के मौसम तक उनका यह मिशन जारी रहेगा। इस तालाब से सादलपुरा, शास्त्रीनगर, तारानगर, सारणेश्वरजी में जलापूर्ति होती है। दो साल से बारिश कम होने से तालाब सूखा पड़ा है।
तालाब खुदाई का धार्मिक महत्व भी...
तालाब का धार्मिक महत्व भी है। बारिश के दिनों में तालाब जब लबालब हो जाता है तो श्रावण और ***** महिने में महिलाएं पूजन करती है। इस कारण महिलाओं का तालाब से विशेष जुड़ाव है। तालाब का पानी पूरे इलाके में पीने के काम आता है। इस कारण भी महिलाएं तालाब से मिट्टी खुदाई में जुटी है ताकि पानी ज्यादा से ज्यादा आ सके।
लबालब भर सकेगा तालाब...
तालाब से मिट्टी हटा रहे हैं, ताकि बारिश के दिनों में लबालब भर सके। तालाब में पानी आएगा तो पूजा अर्चना भी कर सकेंगे। तालाब में पानी होगा तो किल्लत भी नहीं रहेगी। इस काम में क्षेत्र की करीब 15-20 महिलाएं सहभागिता निभा रही है।
गैरकीदेवी, सोनकी देवी, स्थानीय निवासी
जलस्रोतों की संवारने की परम्परा रही...
जल संरक्षण का यह अनूठी पहल है। वैसे हमारे यहां जल स्रोतों को संवारने की परम्परा रही है। बारिश से पूर्व महिलाएं व पुरुष जल्दी उठकर तालाब से मिट्टी खुदाई करते थे। मान्यता हैं कि इससे पुण्य भी मिलता है।
आचार्य प्रदीप दवे, ज्योतिष एवं वास्तुविद सिरोही
Published on:
03 Jun 2022 07:23 pm
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