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सिरोही. शहर में शिक्षा का स्तर सुधर रहा है। कामकाजी लोगों की संख्या बढ़ रही है। साल-दर-साल वाहनों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर बेहतर परिवहन के लिए सड़कों का विस्तार भी तेजी से हो रहा है लेकिन ये सुविधाएं जनसंख्या की बढ़ती गति के सामने दम तोड़ रही हैं। आंकड़े बताते हैं कि शहर में जितनी सुविधाएं बढ़ीं, उससे कहीं ज्यादा आबादी में बढ़ोतरी हुई। ऐसे में जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए सरकार की ओर से नसबन्दी समेत अन्य कार्यक्रम संचालित किए जा रहा हों लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते गत वर्ष प्रदेश में केवल 6 7 फीसदी लक्ष्य हासिल किया जा सका है। ऐसे में परिवार नियोजन काय्र्रक्रम के भरोसे जनसंख्या पर नियत्रंण लगता दिखाई नहीं दे रहा है।
जानकारी के अनुसार चिकित्सा विभाग की ओर से 2016 -17 में प्रदेश में 4 लाख 15 हजार 151 लोगों की नसबन्दी का लक्ष्य तय किया था लेकिन केवल 2 लाख 79 हजार 448 लोगों की ही नसबन्दी की जा सकी है। खास बात यह है कि इनमें केवल 38 33 पुरुषों ने ही नसबन्दी करवाई है। सिरोही जिले में तो केवल 13 ही पुरुषों ने नसबंदी करवाई है। सामाजिक मान्यता एवं अशिक्षा जनसंख्या नियंत्रण में रोड़ा बने हैं। संयुक्त राष्ट्र की ओर से 11 जुलाई 198 7 को विश्व जनसंख्या दिवस की शुरुआत की गई थी।
असाक्षर महिलाएं आगे
चिकित्सा विभाग के आंकड़े पर नजर डालें तो जिले में 1198 निरक्षर महिलाओं व मात्र 9 पोस्ट ग्रेजुएट महिलाओं ने नसबंदी करवाई। ऐसे में साक्षर से निरक्षर महिलाओं का ग्राफ ज्यादा है। हिन्दुओं में 13 पुरुष तथा 4043 महिलाओं ने नसबंदी करवाई। मुस्लिम समाज की 80 महिलाओं ने नसबंदी करवाई। अन्य जाति के लोग नगण्य रहे
बढ़ती आबादी, घटते संसाधन
गत ढाई दशक में जिले की आबादी दोगुनी हो गई लेकिन संसाधनों की कमी खलने लगी है। लोगों को पीने का शुद्ध पानी तक नसीब हो रहा है। वहीं सार्वजनिक परिवहन, रोजगार आदि के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। सरकार की ओर से संचालित जनकल्याणकारी योजनाएं भी ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही हंै। जिले में परिवार नियोजन के क्षेत्र में खास प्रगति नहीं रही है। नसबन्दी के मामले में प्रदेश में 27वें स्थान पर है।
ऐसे बढ़ी जिले की आबादी
वर्ष जनसंख्या
1961 352303
1971 423815
1981 542049
1991 654029
2001 851107
2011 1036346
(प्रत्येक वर्ष 21 से 30 प्रतिशत वृद्धि)
इनका कहना है...
पुरुष नसबंदी के लिए हर तीसरे बुधवार को शिविर भी लगाते हैं लेकिन वे आगे नहीं आते हैं। नसबंदी में महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।
- डॉ. सुशीलकुमार परमार, सीएमएचओ, सिरोही
Published on:
11 Jul 2018 11:27 am
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