दरअसल सीतापुर ही नहीं बल्कि समूचे प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस की स्तिथियाँ अभी रक्षात्मक खेल वाली है। सपा में बिगड़ते माहौल, कई दलों मर हो रही गठबंधन की कवायद, नोटबंदी पर बनते बिगड़ते हालात और बसपा के मुस्लिम खेल जैसे मुद्दों पर इन दोनों ही दलों की पैनी निगाह बनी हुई है। फरवरी के दूसरे सप्ताह से ही शुरू होने वाला यूपी का सियासी घमासान हर किसी के लिए बेहद अहम् है लिहाजा छेत्रीय दलों ने अपने को औरों से बेहतर और समय पूर्व चुनाव के लिए तैयार दिखाते हुए टिकटों की घोषणा कर दी जबकि राष्ट्रीय दलों ने अभी खाता तक नहीं खोला है। बात सीतापुर की करें तो यहाँ की सभी विधानसभाओं पर फिलहाल जिन लोगों को सपा और बसपा का प्रत्याशी बनाया गया है उनकी सूचि इस प्रकार है। इनमें सपा में सिधौली, हरगांव और महमूदाबाद का टिकट फ़िलहाल सूचि में घोषित नहीं किया गया, लेकिन मौजूदा विधायकों के नामों पर ही मोहर लगने की पूरी सम्भावना है। वहीं हरगांव में सपा से मंत्री रामकृष्ण भार्गव के पुत्र का नाम आगे है। उधर सपा में अखिलेश खेमा हावी होने पर विधायक रामपाल यादव भी पार्टी सिम्बल से चुनाव लड़ने में नाकाफी साबित हो सकते हैं और किसी और को सपा का टिकट मिल सकता है।