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साल 2000 में भी आतंकियों ने किया था अमरनाथ यात्रियों का कत्लेआम, सुनिए आंखों देखी

अमरनाथ यात्रियों पर यह पहला हमला नहीं था, इससे पूर्व वर्ष 2000 में काफी बड़ा हमला आतंकियों ने यात्रियों पर किया था और वह भी बेस कैंप पर। इस दौरान सीतापुर के भी आधा दर्जन से अधिक लोग हमले के वक्त वहां मौजूद थे, जिसमें से एक शख्स ने अपनी आंखों देखी पत्रिका को बताई।

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Nitin Srivastva

Jul 14, 2017

amarnath attack

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सीतापुर. अमरनाथ यात्रा एक बार फिर हाई एलर्ट पर है, क्योंकि बीते दिनों ही आतंकियों ने यात्रा से वापस लौट रहे यात्रियों की बस पर हमला बोला। जिसमें 7 लोगों की मौत हो गई। अमरनाथ यात्रियों पर यह पहला हमला नहीं था, इससे पूर्व वर्ष 2000 में काफी बड़ा हमला आतंकियों ने यात्रियों पर किया था और वह भी बेस कैंप पर। जिसमे मरने वालों की संख्या सैकड़ों में थी और इसके बाद मारे जाने वाले आतंकियों की संख्या महज 7 थी। इस दौरान सीतापुर के भी आधा दर्जन से अधिक लोग हमले के वक्त वहां मौजूद थे, जिसमें से एक शख्स ने अपनी आंखों देखी पत्रिका को बताई।


अमरनाथ हमने की आंखों देखी:





बेस कैंप पर हुआ था हमला

सीतापुर के रहने वाले नीरज गुप्ता की उम्र उस वक्त 20 साल के आस पास थी। उनके साथ उनके करीब 6 और साथी साल 2000 में अमरनाथ बाबा की यात्रा पर गये थे। नीरज बताते हैं कि पहले दिन यात्रा नहीं शुरू हुई और हमलोग पहलगाम घूम कर पूरा दिन बिताए। वहीं शाम करीब 7:30 बजे जब हल्का अंधेरा था और पहलगाम के बेस कैंप के भंडारे पर लोगों की भारी मौजूदगी थी, तभी कुछ आतंकी बेस कैंप पर गोलियां बरसाने लगे। देखते ही देखते सैकड़ों लोग मौत के मुह में समां गए। नीरज ने बताया कि अचानक उसकी नजर एक आतंकवादी पर पड़ी और वह गोलियां चला रहा था। तभी एक आर्मी जवान ने उसके सर पर हाथ रखकर जमीन पर बैठा दिया और सामने खड़े मौत बरसा रहे आतंकवादी को गोलियों से भून दिया। जिसके बाद वहीं पास में मौजूद एक ट्रक के नीचे नीरज को पनाह मिली और लगभग डेढ़ घंटे तक वह गोलियों की तड़तड़ाहट सुनता रहा। डेढ़ घंटे बाद जब आर्मी ने अंधेरा करके पूरे इलाके को अपने कब्जे में ले लिया तब किसी जवान ने नीरज को ट्रक के बाहर निकाला। जिसके बाद नीरज ने बताया कि बाहर निकलते ही वहां लाशों का सैलाब सा देखने को मिला और लाशों को ट्रकों में भरकर ले जाते देखा गया। वहीं 7 आतंकियों की तलाश भी की जानी शुरू हो गईं।




यात्रियों को सुरक्षित पहुंचाया गया उनके कैंप

नीरज ने बताया कि इस हादसे के बाद सुरक्षित बचे यात्रियों को जवानों ने उनके उनके कैंप तक पहुंचाया। जहां पहुंचकर सभी ने राहत की सांस ली और बाबा बर्फानी के जयकारे लगाए। नीरज ने बताया कि इतने बड़े हादसे के बाद पहले तो सेना की तरफ से यात्रा को रोके जाने का फरमान सुना दिया गया और इसके कुछ ही देर बाद अमरनाथ जी के दर्शन करने वालों के लिए यात्रा खोल दी गयी। नीरज ने बताया कि अन्य हजारों यात्रियों के साथ अगले दिन से ही उन्होंने ने भी बाबा बर्फानी की यात्रा शुरू की और तीन दिन बाद पहलगाम वापसी की।




10 दिन बाद परिजनों को दी थी जिन्दा होने की खबर

नीरज ने बताया कि उस वक्त मोबाईल का जमाना नहीं था। इस हादसे के बाद उनके परिजनों ने उनके जिन्दा होने की उम्मीद ही छोड़ दी थी। तभी 10 दिन बाद जब आर्मी ने अपना पीसीओ शुरू किया तो लोगों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। कई घंटे बाद जब नीरज ने फोन मिलाकर अपने घरवालों को अपने जिन्दा होने की सूचना दी, तो परिजनों के दिल भर आए और सभी ने फौरन वापस आने को कहा।


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