
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ से हाहाकार, अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं कई नदियां
लखनऊ. उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों में इन दिनों बाढ़ का तांडव लगातार जारी है। बाराबंकी, बलरामपुर, बहराइच, रायबरेली, फैजाबाद, सीतापुर और हरदोई समेत कई जिलों में अभी भी नदी का पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। हालांकि हालात पहले से कुछ सामान्य हुए हैं, लेकिन यहां रह रहे लोगों को बाढ़ की समस्या से अभी पूरी तरह से निजात नहीं मिल सकी है। बाढ़ के पानी ने इन जिलों के सैकड़ों गांवों को तो बुरी तरह प्रभावित किया ही है, साथ ही यहां के प्राइमरी स्कूल और अस्पतालों में भी नदी का पानी लबालब भरा है। जो बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी के लिए परेशानी का सबब बन गया है।
अभी नहीं टली मुसीबत
बात अगर बाराबंकी जिले की करें तो यहां के तराई इलाकों में बाढ़ की मुसीबत फिलहाल अभी टलती नजर नहीं आ रही है। घाघरा नदी के जलस्तर में कमी तो आई है, लेकिन बाढ़ का पानी पूरी तरह से कम नहीं हुआ है। तमाम रास्ते और गांव अब भी बाढ़ की चपेट में हैं। वहीं घाघरा से होने वाली तबाही का दायरा भी दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है। बाढ़ के पानी ने रामनगर, सिरौलीगौसपुर, रामसनेहीघाट और फतेहपुर तहसील के तमाम गांवों को बुरी तरह डुबो दिया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में नेता से लेकर तमाम आलाधिकारी लगातार दौरा कर रहे हैं। अधिकारी ग्रामीणों को राहत सामग्री पहुंचाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन फिर भी कई लोग कोई मदद न मिलने का आरोप लगा रहे हैं।
सैकड़ों लोग हुए बेघर
वहीं सीतापुर जिले में भी घाघरा नदी की कटान से सैकड़ों लोग बेघर हुए और सुरक्षित जगहों पर अपना नया ठिकाना बना रहे हैं। एक तरफ लोग तो लोग बाढ़ से परेशान हैं जबकि दूसरी तरफ कई गांवों में लोग बीमार भी पड़ रहे हैं। लोग जुकाम, बुखार, खांसी, मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियों से पीड़ित हैं। जिनके इलाक के लिए प्रशासन ने अभी तक कोई ठोस इंतजाम नहीं किया है।
कटान से मची अफरा-तफरी
बलरामपुर जिले की अगर बात करें तो यहां राप्ती नदी के तट पर बना ककरा राजघाट तटबन्ध कटने की कगार पर पहुंच गया है। राप्ती नदी की तेज कटान से अफरा-तफरी मची हुई है। ककरा राजघाट का तटबंध कटने की कगार पर पहुंच गया है। दो दर्जन से अधिक गांवों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। तटबंध कटने से भीषण तबाही की सम्भावना है। तीन दर्जन से अधिक गांव सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। सिंचाई विभाग और प्रशासन की लापरवाही को लेकर ग्रामीण में आक्रोश है। तटबंध की कटान को लेकर ग्रामीणों में दहशत है। तटबंध कटने से भारी तबाही का सामना करना पड़ सकता है। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण तटबंध को बचाने में जुटे हैं। बाढ़ खंड के एक्सईएन और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद हैं। 24 घंटे पहले जो नदी बांध से 25 मीटर दूर बह रही थी वो अब बांध को पूरी तह क्षतिग्रस्त कर चुकी है।
खतरे के निशान से ऊपर घाघरा
गोंडा जिले में भी 24 घंटे में घाघरा नदी का जलस्तर सोमवार को 16 सेटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश से घाघरा का जलस्तर अभी और बढ़ने की संभावनाएं हैं। घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से 69 सेंटीमीटर ऊपर है। घाघरा और सरयू नदी से निकल रहे बाढ़ के पानी से अब तक क्षेत्र की 35 ग्राम पंचायतों के 142 से अधिक मजरे प्रभावित हो चुके है। प्रशासन ने इन गांवों में 82 नावें लगाई गई हैं इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को राहत सामग्री भी बांटी जा रही है।
फैजाबाद भी बाढ़ से बेहाल
फैजाबाद जिले में सरयू में आई उफान फिलहाल स्थिर है। हालांकि अभी भी सरयू खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। सरयू का जलस्तर स्थिर होने के बाद अयोध्या समेत दूसरे तटबंधों के पास बसे गांवों में पानी घटने लगा है। हालांकि बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोग इंतजाम पर्याप्त नहीं होने का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि जानवरों के चारे और उनके लिए दवाओं के इंतजाम मुहैया नहीं हो पा रहे हैं। वहां बाढ़ राहत कैंपों की स्थिति भी जस की तस बनी हुई है और स्थानीय लोगों का कहना है कि वहां लेखपालों के अलावा किसी भी राहत कैंप पर सरकारी कर्मचारी नजर नहीं आ रहे हैं।
Published on:
21 Aug 2018 03:04 pm
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