
representative picture (AI)
आज विश्व जल दिवस है। अलवर जिले के पानी एक जटिल समस्या बनी हुई है। अधिकारी कागजों में प्लान बनाते हैं और धरातल पर काम नहीं होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस बार भी हालात कुछ ऐसे ही नजर आ रहे हैं। जिसके चलते लोगों को गर्मियों में पानी की किल्लत का सामना करना पड़ेगा।
राजनीतिक लड़ाई के चलते सिलीसेढ़ से बोरिंग के जरिए शहर को मिलने वाले पानी की योजना धरातल पर शुरू नहीं हो पाई। ऐसे में गर्मियों में पानी के हालात भयावह हो सकते हैं। विभाग ने इस बार भी पानी की समस्या को दूर करने का कोई स्थाई समाधान नहीं निकाला है। विभाग के कंटीजेंसी प्लान को स्वीकृति मिल गई है। लेकिन गर्मी सिर पर है और इस प्लान से शायद ही लोगों की प्यास बुझ पाए। प्लान में 40 नई मोटर, 38 बिजली पैनल, 5000 मीटर थ्री फेज केबल, 300 मीटर जीआइ पाइप और 2000 मीटर आर्म्ड केबल की स्वीकृति मिली है। विभाग का दावा है कि खराब मोटरों को तुरंत बदला जाएगा और केबल फॉल्ट की समस्या दूर की जाएगी, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अभी तक खरीद प्रक्रिया तक शुरू नहीं हो सकी है।
शहर की कई कॉलोनियों में अभी भी 24 से 48 घंटे के अंतराल में जलापूर्ति हो रही है। सर्दियों में पानी की खपत होने के बावजूद शहरवासियों को पूरा पानी नहीं मिल पाया। पिछले वर्षों में भी टैंकरों के सहारे जलापूर्ति करनी पड़ी थी, जिससे विभाग की व्यवस्थाओं की पोल खुल चुकी है। इस बार भी यही लग रहा है कि पानी टैंकरों के माध्यम से ही लोगों को मिल सकेगा।
शहर में आए दिन पाइपलाइन लीक होने की शिकायतें मिल रही हैं। कई जगहों पर पुरानी और जर्जर पाइपलाइन से पानी व्यर्थ बह रहा है, लेकिन विभाग की ओर से भेजे गए 30 से 31 लाख मीटर पाइपलाइन के प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं मिली। ऐसे में पाइपलाइन टूटने पर सुधार कार्य में देरी होना तय है, जिससे पानी की बर्बादी और सप्लाई बाधित होगी।
शहर में वार्ड : 65
आबादी : 4.62 लाख
पानी की जरूरत : 95 लाख लीटर रोजाना
आपूर्ति : 40 से 45 लाख लीटर रोजाना
नलकूप : करीब 400
ओवरहेड टैंक : 140
Published on:
22 Mar 2026 11:16 am
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